ईरान ने अपनी युद्ध नीति में एक बड़ा बदलाव किया है. अब वह सिर्फ अपने प्रॉक्सी समूहों के जरिए ताकत नहीं दिखाएगा, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए खुद अपने हथियारों का इस्तेमाल करेगा. हाल ही में ईरान ने इसराइल पर सीधे मिसाइल हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और रणनीतिक माहौल बदल गया है.
ईरान ने क्यों बदला अपने हमले का तरीका?
ईरान अब अपने प्रॉक्सी समूहों, खास तौर पर लेबनान के Hezbollah, की रक्षा के लिए सीधे तौर पर मिसाइलों का उपयोग कर रहा है. ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार Mohsen Rezaei ने साफ शब्दों में कहा कि लेबनान और Hezbollah उनके लिए ‘नॉन-नेगोशिएबल रेड लाइन’ हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि लेबनान पर किसी भी तरह का हमला ईरान की तरफ से एक जोरदार प्रतिक्रिया को जन्म देगा.
गल्फ देशों और अमेरिका पर इसका क्या असर होगा?
ईरान की सैन्य गतिविधियां अब अधिक महत्वाकांक्षी हो गई हैं और वह अलग-अलग क्षेत्रों को एक नई रणनीति से जोड़ रहा है. जून की शुरुआत में ईरान ने Kuwait और Bahrain का नाम लेते हुए उन पर आरोप लगाया कि वहां से उसके तेल टैंकर और Qeshm Island के टेलीकॉम टावर पर हमले हुए. ईरान ने इन हमलों का जवाब देने के लिए अपनी सभी क्षमताओं का उपयोग करने की चेतावनी दी है. साथ ही, अमेरिका के साथ होने वाली बातचीत को अब लेबनान की स्थिति से जोड़ दिया गया है.
युद्धविराम और सुरक्षा की ताजा स्थिति क्या है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने 8 जून 2026 को पुष्टि की कि युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन हुआ है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए ईरान जब भी जरूरी समझेगा, एक्शन लेगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अब अपनी परमाणु योजना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान जैसे मुद्दों को एक साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है ताकि वह इसराइल और अमेरिका पर दबाव बना सके.
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने इसराइल पर सीधे हमले क्यों किए?
लेबनान में इसराइली सैन्य ऑपरेशनों के जवाब में और अपने प्रॉक्सी समूह Hezbollah की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान ने सीधे मिसाइल दागे.
गल्फ देशों के लिए ईरान की चेतावनी क्या है?
ईरान ने Kuwait और Bahrain पर अपने तेल टैंकरों और संचार टावरों पर हमले करने का आरोप लगाया और भविष्य में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
