UN Security Council में समुद्री सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस हुई है. अमेरिका ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जहाजों की आवाजाही के लिए ईरान जो फीस मांग रहा है, वह असल में रिश्वत है. इस विवाद के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है और दुनिया भर की नजरें अब इस जलमार्ग पर टिकी हैं.
ईरान का नया प्लान क्या है और वह क्या चाहता है?
ईरान की संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमीशन के हेड Ebrahim Azizi ने बताया कि ईरान एक नया कानून ला रहा है. इस कानून के तहत Strait of Hormuz पर ईरान की सेना का पूरा कंट्रोल होगा. ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- जहाजों से ली जाने वाली फीस का भुगतान ईरान की लोकल करेंसी Rial में करना होगा.
- ईरान उन जहाजों को रास्ता देने से मना कर देगा जिन्हें वह अपना दुश्मन मानता है.
- ईरान इसे ‘रास्ते की सुरक्षा’ के नाम पर शुल्क वसूलने का तरीका बता रहा है.
- कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक जहाज को रास्ता देने के लिए 2 मिलियन डॉलर तक की पेमेंट की बात सामने आई है.
UN और अन्य देशों ने ईरान की इस मांग पर क्या कहा?
ईरान के इस कदम का दुनिया भर में विरोध हो रहा है और इसे गैरकानूनी बताया गया है. इस मुद्दे पर अलग-अलग अधिकारियों ने अपनी बात रखी है:
- UN की समुद्री एजेंसी (IMO) के सेक्रेटरी जनरल Arsenio Dominguez ने साफ कहा कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है.
- फ्रांस के विदेश मंत्री Jean-Noël Barrot ने कहा कि इस जलमार्ग के बंद होने से जो संकट पैदा हुआ है, उसकी पूरी जिम्मेदारी ईरान की है.
- अमेरिका के राजदूत ने UN Security Council में कहा कि ईरान ने अपने समर्थकों के जरिए नागरिक जहाजों और समुद्री ट्रैफिक को निशाना बनाया है.
- शिपिंग इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर इस तरह एकतरफा फीस मांगने का कोई पुराना इतिहास नहीं रहा है.
क्या इस विवाद से व्यापार पर असर पड़ेगा?
ईरान इस पूरी योजना को Oman के साथ मिलकर तैयार कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत में भी रुकावट आई है क्योंकि अमेरिकी दूतों की यात्राएं रद्द हो गई हैं. अगर यह विवाद बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है और सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है.