Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है जिससे दुनिया भर के व्यापार पर असर पड़ सकता है। जहाँ पहले यहाँ से रोज़ाना औसतन 140 जहाज गुज़रते थे, अब यह गिनती घटकर सिर्फ 5 जहाज रह गई है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी ने इस अहम समुद्री रास्ते को अब युद्ध के मैदान जैसा बना दिया है।
Strait of Hormuz में क्या हुआ और जहाजों की आवाजाही क्यों घटी?
ईरान ने घोषणा की है कि उसने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटने के बाद ही इसे फिर से खोलेगा। 22 और 23 अप्रैल के बीच ईरानी बलों ने MSC Francesca और Epaminondas नाम के दो कंटेनर जहाजों को जब्त कर लिया और Euphoria नाम के एक जहाज पर हमला किया। 25 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में केवल पाँच जहाजों ने इस रास्ते का इस्तेमाल किया, जिसमें एक ईरानी तेल टैंकर भी शामिल था। शिपिंग कंपनियाँ अब बिना किसी पक्की गारंटी के यहाँ जहाज भेजने से डर रही हैं।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अमेरिका का ‘शूट एंड किल’ आदेश क्या है?
भारत सरकार ने पुष्टि की है कि जिन जहाजों (Euphoria और Epaminondas) पर फायरिंग हुई थी, उनमें सवार सभी 22 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना को आदेश दिया है कि अगर कोई भी नाव इस समुद्री मार्ग में खदानें बिछाते हुए पाई जाती है, तो उन पर तुरंत गोली चलाकर उन्हें मार गिराया जाए। ट्रंप ने खदान हटाने के अभियानों को तीन गुना तेज़ करने का भी निर्देश दिया है।
ईरान के नए नियम और ट्रांजिट शुल्क का क्या मामला है?
ईरान ने अब Strait of Hormuz से गुज़रने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना बनाई है और कुछ राजस्व वसूलना भी शुरू कर दिया है। हालांकि, रूस जैसे कुछ मित्र देशों के लिए ट्रांजिट शुल्क में छूट दी गई है। ईरानी राजदूत Kazem Jalali ने कहा कि नए कानूनी ढांचे के तहत ही अब जहाज इस मार्ग से गुजर सकेंगे। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ़ किया कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक पूर्ण युद्धविराम और रास्ते को फिर से खोलना असंभव होगा।