ईरान और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को अमानवीय बताया है। ईरान का कहना है कि ये नियम मानवाधिकारों के नाम पर सिर्फ दिखावा हैं, जबकि इनका असली मकसद वहां के आम लोगों के बुनियादी अधिकारों को छीनना है।
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EU के प्रतिबंधों पर ईरान का क्या आरोप है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी, जिसे IRNA न्यूज़ एजेंसी ने भी साझा किया। इस विवाद से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- ईरान के मुताबिक EU का यह ‘नैतिक नाटक’ अब किसी को स्वीकार नहीं है।
- ईरान का मानना है कि इन प्रतिबंधों से दुनिया में यूरोपीय संघ की साख कम होगी।
- यूरोपीय संघ ने 29 जनवरी 2026 और 17 मार्च 2026 को मानवाधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर नए प्रतिबंध लगाए थे।
- 12 अप्रैल 2026 को इन प्रतिबंधों की अवधि को एक साल और बढ़ा दिया गया था।
ईरान के विदेश मंत्री का दौरा और रूस से मुलाकात
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi एक अहम राजनयिक दौरे पर हैं। वे क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए अलग-अलग देशों की यात्रा कर रहे हैं:
- विदेश मंत्री ने पाकिस्तान और ओमान का दौरा किया और अब वे रूस में राष्ट्रपति Vladimir Putin से बातचीत कर रहे हैं।
- इन मुलाकातों का मकसद उन परिस्थितियों पर चर्चा करना है जिन्हें ईरान ‘अमेरिका द्वारा थोपा गया आक्रमण’ कहता है।
- पाकिस्तान फिलहाल ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का काम कर रहा है।
- ईरान ने साफ किया है कि वह अपनी बात अमेरिका तक पहुँचाने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल करेगा, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उसकी कोई सीधी मुलाकात तय नहीं है।
Strait of Hormuz और अमेरिका के साथ बातचीत की स्थिति
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कुछ प्रस्ताव भी सामने आए हैं, लेकिन उनमें सहमति बनना मुश्किल लग रहा है:
- ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरान की नाकाबंदी खत्म करता है और मौजूदा संघर्ष को रोकता है, तो वह Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण छोड़ सकता है।
- हालांकि, उम्मीद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।
- ईरान का कहना है कि बातचीत में देरी की वजह वॉशिंगटन की जरूरत से ज्यादा मांगें और उनके बदलते रुख हैं।