ईरान ने यूरोपीय संघ यानी EU की तरफ से लगाए गए नए मानवाधिकार प्रतिबंधों को कड़ा विरोध दर्ज कराया है। तेहरान ने इस कदम को पूरी तरह से पाखंड बताया है और इसे बुराई का प्रतीक कहा है। यूरोपीय संघ ने 24 जुलाई 2026 को यह फैसला लिया था, जिसके बाद 25 जुलाई 2026 को ईरान की ओर से यह तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
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किन लोगों पर लगी पाबंदी
यूरोपीय संघ ने ईरान के 6 प्रमुख लोगों पर ये प्रतिबंध लागू किए हैं। इनमें ईरान की रीजनल रिवोल्यूशनरी कोर्ट के 5 जज शामिल हैं, जिन पर धार्मिक अल्पसंख्यकों और राजनीतिक विरोधियों, जिनमें नोबेल शांति पुरस्कार विजेता Narges Mohammadi भी शामिल हैं, उनके खिलाफ गलत तरीके से मुकदमे चलाने का आरोप है। इसके अलावा, Nima Salehi को भी सूची में रखा गया है, जो Ashiyane साइबर ग्रुप से जुड़े हैं। उन पर ईरान की साइबर पुलिस और IRGC के साथ मिलकर साइबर हमले करने का आरोप है।
इन पाबंदियों के तहत संबंधित लोगों की संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और उनके EU देशों में यात्रा करने पर रोक लगा दी गई है। साथ ही, उन्हें किसी भी तरह का आर्थिक संसाधन मुहैया कराने पर भी मनाही है।
ईरान का पलटवार
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखते हुए यूरोपीय संघ के इस फैसले की निंदा की। उन्होंने कहा कि EU का यह रुख पाखंड की पराकाष्ठा है। उनका कहना है कि एक तरफ वे मानवाधिकार की बात करते हैं, दूसरी तरफ वे ईरान के लोगों के खिलाफ होने वाली हिंसा में तकनीकी मदद दे रहे हैं। इस नई कार्रवाई के बाद अब EU की ओर से ईरान पर कुल 269 व्यक्तियों और 53 संस्थाओं पर प्रतिबंध लागू हैं।
