ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ (EU) के उस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है जिसमें ईरान की आत्मरक्षा की कार्रवाई की आलोचना की गई थी। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने यूरोपीय संघ के इस रुख को दोहरा मापदंड और गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताया है। उन्होंने साफ किया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है और किसी को भी इस पर सवाल उठाने का हक नहीं है।
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ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ को क्यों घेरा?
ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यूरोपीय संघ का यह बयान उनके पक्षपातपूर्ण रवैये को उजागर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ एक तरफ तो अमेरिका और इजरायल के अवैध हमलों पर पूरी तरह मौन रहता है, लेकिन जब ईरान अपनी रक्षा में जवाबी कार्रवाई करता है तो वह आलोचना करने लगता है। बकाई ने इसे यूरोपीय संघ का एकतरफा और नैतिक रूप से गिरा हुआ कदम बताया है।
पड़ोसी देशों की जमीन के इस्तेमाल पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान ने स्पष्ट किया है कि जिन पड़ोसी देशों के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमले करने के लिए किया गया था, वहां जवाबी कार्रवाई करना उसका कानूनी अधिकार है। इस्माइल बकाई ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक किसी भी देश को अपनी जमीन या सैन्य संपत्ति का उपयोग दूसरे देश पर हमला करने के लिए नहीं होने देना चाहिए। ईरान ने केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया है जिनका उपयोग उसके खिलाफ हमले के लिए किया गया था।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन करने की दी सलाह
ईरानी प्रवक्ता ने यूरोपीय बाहरी कार्रवाई सेवा (EEAS) और यूरोपीय संघ को सलाह दी है कि वे अपने पुराने दावों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों पर टिके रहें। उन्होंने कहा कि हमलावरों का समर्थन करना बंद किया जाना चाहिए और अपनी रक्षा करने वाले देशों पर झूठे आरोप लगाना बंद होना चाहिए। ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने यूरोपीय संघ के बयान को क्या कहा है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने यूरोपीय संघ के बयान को दोहरा मापदंड और पाखंड से भरा बताया है, क्योंकि इसमें ईरान की आत्मरक्षा के अधिकार की आलोचना की गई थी।
ईरान ने किस अधिकार के तहत कार्रवाई की बात कही है?
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए उन ठिकानों पर हमला करने की बात कही है जहां से उस पर हमले शुरू किए गए थे।
