संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुई बैठक के बाद वैश्विक तनाव काफी बढ़ गया है। 10 जून 2026 को ईरान ने इस बैठक का कड़ा विरोध करते हुए इसे पाखंड और दोहरे मापदंड का एक और नमूना बताया। ईरान का कहना है कि इस बैठक का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह सुरक्षा परिषद के अधिकारों का गलत इस्तेमाल है। इस बैठक में परमाणु प्रतिबंधों और यूरेनियम के भंडार को लेकर विभिन्न देशों के बीच तीखी बहस देखने को मिली है।
ईरान, चीन और रूस ने बैठक के कानूनी आधार पर उठाए सवाल
ईरान, चीन और रूस का स्पष्ट मानना है कि ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से जुड़ा संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव 2231 पिछले साल 18 अक्टूबर 2025 को ही खत्म हो चुका है। इसलिए अब इस मुद्दे पर बैठक करने का कोई मतलब नहीं बनता है।
- ईरान का पक्ष: ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि यह बैठक अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने IAEA के ड्राफ्ट प्रस्ताव की आलोचना करते हुए इसे अमेरिकी और इजरायली हमलों को छिपाने की कोशिश करार दिया।
- रूस का रुख: रूस के प्रतिनिधि Vassily Nebenzia ने कहा कि सुरक्षा परिषद के ईरान विरोधी प्रतिबंध अब लागू नहीं हैं और यह प्रस्ताव 2025 में ही समाप्त हो गया था। उन्होंने पश्चिमी देशों पर प्रतिबंधों का झूठा भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
- चीन की सलाह: चीनी दूत Sun Lei ने सुरक्षा परिषद से इस मामले में सावधानी और समझदारी बरतने की अपील की और कहा कि परिषद को इस मुद्दे पर विचार करना बंद कर देना चाहिए।
अमेरिका, UAE और अन्य देशों ने प्रतिबंधों को लागू करने की मांग की
दूसरी तरफ, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन समेत आठ देशों ने एक साझा बयान जारी किया है। इन देशों का दावा है कि ईरान पर सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध दोबारा लागू हो चुके हैं और सभी देशों को इसका पालन करना चाहिए।
- प्रतिबंध लागू करने की अपील: फ्रांस के प्रतिनिधि Jerome Bonnafont ने इन आठ देशों की तरफ से बोलते हुए सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से ईरान पर लगे प्रतिबंधों को पूरी तरह लागू करने की मांग की।
- यूरेनियम भंडार पर चिंता: साझा बयान में चिंता जताई गई कि ईरान के पास बहुत अधिक मात्रा में संवर्धित यूरेनियम (highly enriched uranium) का भंडार जमा हो गया है।
- अमेरिकी मांग: अमेरिकी प्रतिनिधि Tammy Bruce ने सुरक्षा परिषद की ब्रीफिंग में ईरान से मांग की कि वह अपने यूरेनियम भंडार और परमाणु गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को दे।
क्या है प्रतिबंधों से जुड़ा यह पूरा गतिरोध?
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह परमाणु समझौते (JCPOA) का ‘स्नैपबैक’ (snapback) नियम है। अमेरिका और यूरोपीय देशों का दावा है कि उन्होंने अगस्त 2025 में इस नियम का इस्तेमाल करके ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंध फिर से लागू कर दिए थे। वहीं, ईरान, रूस और चीन का तर्क है कि प्रस्ताव 2231 की समय सीमा अक्टूबर 2025 में खत्म होने के बाद अब किसी भी प्रतिबंध का कोई कानूनी आधार नहीं बचा है। इसी कानूनी असहमति के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मुद्दे पर गहरा गतिरोध बना हुआ है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का विरोध क्यों किया?
ईरान का तर्क है कि परमाणु समझौते से जुड़ा प्रस्ताव 2231 अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका है, इसलिए इस बैठक का कोई कानूनी आधार नहीं है और यह सुरक्षा परिषद के अधिकारों का दुरुपयोग है।
अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की मुख्य चिंता क्या है?
अमेरिका, फ्रांस, UAE और अन्य सहयोगी देशों का कहना है कि ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को एक साल से अधिक समय से संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर जाने की अनुमति नहीं मिली है।
