अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने मिलकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की मांग की है. इस बयान के बाद ईरान ने कड़ी नाराजगी जताई है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को दखलअंदाजी और भड़काने वाला करार दिया है.
बहरीन में हुई थी बैठक
यह पूरा मामला गुरुवार, 25 जून 2026 को बहरीन में हुई एक बैठक से शुरू हुआ. इस मीटिंग में अमेरिका और GCC के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने ईरान की परमाणु गतिविधियों पर लगाम लगाने की बात कही थी. इसके तुरंत बाद शुक्रवार, 26 जून 2026 को ईरान ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
ईरान के गंभीर आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका और इसराइल ने उसके परमाणु कार्यक्रम के बारे में झूठे आरोप लगाए हैं. ईरान ने साफ किया कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. ईरान ने GCC देशों से अपील की कि वे अमेरिका के साथ खड़े होने के बजाय पश्चिम एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने में सहयोग करें.
ईरान ने अमेरिका के उन दावों को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि वह GCC देशों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. ईरान के मुताबिक, अमेरिका की बातें सिर्फ दिखावा हैं और क्षेत्र में अमेरिकी सेना की मौजूदगी से असुरक्षा और बंटवारा बढ़ा है.
मिसाइल और ड्रोन पर रुख
ईरान ने साझा बयान में अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के जिक्र का भी विरोध किया है. ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता और सैन्य रक्षा के मामले में कोई ढील नहीं देगा. साथ ही, ईरान ने उन देशों को चेतावनी दी है जिनकी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमलों के लिए किया था. ईरान ने इन देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और अपनी जमीन को दुश्मन के लिए इस्तेमाल न करने को कहा.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को लेकर ईरान ने कहा कि वहां होने वाली गड़बड़ियों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इसराइल जिम्मेदार हैं. ईरान ने याद दिलाया कि यह इलाका ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां शिपिंग का प्रबंधन तय नियमों के हिसाब से होना चाहिए. ईरान का मानना है कि इलाके में शांति तभी आएगी जब बाहरी देशों का दखल खत्म होगा और क्षेत्रीय देश आपस में सहयोग करेंगे.
