ईरान के टॉप डिप्लोमैट अब्बास अराघची और दक्षिण कोरिया के स्पेशल एनवॉय चांग ब्युंग-हा के बीच तेहरान में एक अहम मुलाकात हुई. इस मीटिंग में ईरान ने साफ़ तौर पर कहा कि गल्फ क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जो अस्थिरता है, उसकी असली वजह अमेरिका और इसराइल की आक्रामकता है. ईरान का मानना है कि जब तक बाहरी दखल रहेगा, तब तक इस इलाके में शांति आना मुश्किल है.
ईरान और दक्षिण कोरिया की मुलाकात में क्या बातें हुईं?
तेहरान में हुई इस मीटिंग के दौरान अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका और इसराइल की हरकतों की वजह से पूरे इलाके में खतरा बढ़ा है. उन्होंने बताया कि ईरान एक तटीय देश है और उसने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत अपनी सुरक्षा और हितों के लिए जरूरी कदम उठाए हैं. ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वे अमेरिका और इसराइल की इन हरकतों की कड़ी निंदा करें. इसके साथ ही, ईरान ने दक्षिण कोरिया के साथ अपने रिश्तों और सहयोग को और बेहतर बनाने की इच्छा जताई है, जिसका दक्षिण कोरियाई दूत ने स्वागत किया है.
सीजफायर और अमेरिका की नाकेबंदी पर ईरान का क्या कहना है?
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद-बाघेर गालिबाफ ने एक बयान में कहा कि सीजफायर तभी सार्थक होगा जब नौसेना की नाकेबंदी और दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा काम बंद होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल अपनी सैन्य ताकत या दादागिरी से अपने मकसद हासिल नहीं कर पाए हैं. दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाने का ऐलान किया है, लेकिन ईरान के बड़े नेताओं ने अभी तक इस घोषणा पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है.
गल्फ क्षेत्र में नौसेना की हलचल और ताजा अपडेट
पिछले 24 घंटों में गल्फ क्षेत्र में काफी तनाव देखा गया है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी की है, जिसकी वजह से करीब 31 जहाजों को वापस लौटने या पोर्ट पर रुकने का निर्देश दिया गया. ईरान ने इस नाकेबंदी को सीजफायर का उल्लंघन बताया है और जवाबी कार्रवाई में कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं. इसी बीच अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व में भी बदलाव हुआ है, जहां जॉन फेलन ने अपना पद छोड़ दिया है और अब हंग काओ एक्टिंग सिविलियन लीडर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.
