ईरान अपने स्पेस प्रोग्राम को लेकर काफी गंभीर है और उसने साफ कर दिया है कि बाहरी धमकियां उसे रोक नहीं सकेंगी। देश में अब ‘Pars-2’ सैटेलाइट को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी तेज़ी से चल रही है। सरकार का कहना है कि उनके पास अपनी काबिलियत और एक्सपर्ट्स हैं, जो किसी भी मुश्किल परिस्थिति में काम करना जानते हैं।
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सैटेलाइट लॉन्च की तैयारी और लक्ष्य
ईरान के सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) मंत्री Seyed Sattar Hashemi ने जानकारी दी कि Pars-2 सैटेलाइट के लॉन्च के लिए पूरी प्लानिंग कर ली गई है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘Martyr Soleimani’ सैटेलाइट ग्रुप पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है। यह ग्रुप मुख्य रूप से टेलीकम्युनिकेशन यानी बातचीत के साधनों को बेहतर बनाने के लिए है और इसे मार्च 2027 तक लॉन्च करने की उम्मीद है।
हमले के बाद भी काम जारी
ईरानी स्पेस एजेंसी (ISA) के प्रमुख Hassan Salarieh ने कहा कि उनके प्रोजेक्ट्स बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि युद्ध जैसी स्थितियों की वजह से काम रुका है। दरअसल, 13 मार्च 2026 को ईरान स्पेस रिसर्च सेंटर (ISRC) की फैसिलिटी पर एक मिलिट्री हमला हुआ था, जिसमें कुछ इमारतों को नुकसान पहुँचा था। हालांकि, सेंटर के एक्टिंग हेड Nader Mokari ने कन्फर्म किया कि टीम ने बहुत जल्दी सिस्टम को फिर से ठीक कर लिया और रिसर्च का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहा।
आम लोगों को कैसे होगा फायदा
सरकार इस स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल देश की बुनियादी समस्याओं को सुलझाने के लिए करना चाहती है। ICT मंत्रालय ने एक विजन तैयार किया है जिसके तहत इन सैटेलाइट्स का उपयोग इन कामों में होगा:
- स्मार्ट खेती और पानी के मैनेजमेंट के लिए।
- ज़मीन के सही इस्तेमाल और डेटा आधारित शासन के लिए।
- ई-गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए।
- देश में बिजली और ऊर्जा की कमी को दूर करने के लिए।
ईरान सरकार अब अपने स्पेस सेक्टर को और मज़बूत करने के लिए नए बदलाव कर रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग के मौके भी तलाश रही है।