अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ट्रंप ने ईरान की आर्थिक हालत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वहां के लोगों को खाने की जरूरत है। इस पर ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने ट्रंप को करारा जवाब दिया है।

3 जुलाई 2026 को गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने ट्रंप के ‘भूखे राष्ट्र’ वाले बयान को गलत बताया। गालिबफ ने कहा कि अमेरिका खुद अपनी घरेलू समस्याओं को ईरान पर थोप रहा है। उन्होंने ट्रंप को याद दिलाया कि अमेरिका के करीब 4 करोड़ नागरिक फूड स्टैम्प (SNAP) पर निर्भर हैं। गालिबफ ने ट्रंप से कहा कि वे अपनी कुपोषण दर पर ध्यान दें और अपनी सलाह अपने पास रखें।

राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की अर्थव्यवस्था बहुत कमजोर हो चुकी है और वहां महंगाई 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ट्रंप का कहना था कि ईरान को मक्का, गेहूं और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थों की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिकी किसान इन चीजों की आपूर्ति करें। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के जमा किए हुए पैसों में से कुछ हिस्सा लेकर वहां के लोगों को खाना खिला सकता है।

अमेरिका के पास ईरान के करीब 12 अरब डॉलर जमा हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इन पैसों का इस्तेमाल केवल अमेरिकी मानवीय सामान खरीदने के लिए हो। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ किया कि जब तक बातचीत में तरक्की नहीं होगी, तब तक ये पैसे नहीं छोड़े जाएंगे। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी किसानों को फायदा होगा और ईरान के लोगों को खाना मिलेगा।

हालांकि गालिबफ ने ट्रंप की बात को खारिज कर दिया, लेकिन ईरान के कृषि मंत्री গোলামरेजा गेज़लजेह ने एक अलग संकेत दिया। उन्होंने कहा कि ईरान उन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से जरूरी सामान खरीद सकता है जिनमें अमेरिकी शेयरहोल्डर्स हैं। लेकिन यह तभी होगा जब कीमत, क्वालिटी और सेहत के मानक पूरे होंगे। अगर शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो सामान कहीं और से मंगवाया जाएगा।

जून 2026 के मध्य में वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों को अपने विवाद सुलझाने के लिए 60 दिन का समय मिला है। इससे पहले 2023 में भी एक ढांचा तैयार हुआ था, लेकिन अक्टूबर 2023 में इसराइल पर हुए हमले के बाद ईरान अपने फंड का इस्तेमाल नहीं कर पाया था।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.