ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब एक नए दौर में कदम रख रही है जहां अमेरिका और पश्चिमी देशों की ताकत कम हो रही है। गालिबफ के मुताबिक अब दुनिया की कमान ‘ग्लोबल साउथ’ के हाथों में होगी और यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है।

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क्या है ईरान का ’70 दिन का प्रतिरोध’ और इसका असर?

गालिबफ ने बताया कि ईरान ने अमेरिका और इसराइल के सैन्य और आर्थिक दबाव का डटकर सामना किया। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस ’70-दिन के प्रतिरोध’ में ईरान की सेना ने इसराइली इलाकों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रोजाना मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को भी बंद कर दिया था, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों पर भारी असर पड़ा।

दुनिया में क्या बदलाव आ रहे हैं और किन देशों की भूमिका है?

ईरान ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस विजन का जिक्र किया जिसमें दुनिया में बड़े बदलाव की बात कही गई थी। यह बयान बीजिंग में राष्ट्रपति शी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद आया है। क्षेत्रीय शांति के लिए पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री भी तेहरान पहुंचे हैं ताकि अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई शांति बातचीत को दोबारा शुरू किया जा सके। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने लेबनान और इसराइल के बीच युद्धविराम को 45 दिन और बढ़ाने की बात का स्वागत किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री व्यापार पर नया अपडेट

ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को मैनेज करने और फीस वसूलने के लिए एक नया सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस मुद्दे पर यूरोपीय देशों और जापान के साथ बातचीत चल रही है ताकि समुद्री रास्ता सुरक्षित रहे और व्यापार में कोई रुकावट न आए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

गालिबफ ने ‘ग्लोबल साउथ’ के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिमी देशों का दबदबा अब खत्म हो रहा है और आने वाले समय में ग्लोबल साउथ के देश दुनिया का नेतृत्व करेंगे।

ईरान के 70 दिनों के प्रतिरोध का क्या मतलब था?

इसका मतलब 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए उन सैन्य अभियानों से है जिसमें ईरान ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया था और समुद्री रास्ता बंद किया था।