ईरान ने साफ़ किया है कि वह अपनी सैन्य कार्रवाई तभी रोकेगा जब उस पर होने वाले हमले बंद होंगे। सऊदी मीडिया के अनुसार ईरान की सेना ने यह बयान 7 अप्रैल 2026 को जारी किया है। इस समय ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच हालात बहुत खराब हैं और खाड़ी देशों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है। अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया है जिसके बाद ईरान ने यह शर्त रखी है।

ईरान की मांगें और ट्रंप का दो हफ्ते का अल्टीमेटम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध में दो हफ्ते के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया है। ट्रंप ने शर्त रखी है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलना होगा। इससे पहले ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। ईरान ने ट्रंप की इस अस्थायी शांति की बात को नहीं माना है और वह हमले रोकने के लिए पक्की गारंटी चाहता है।

  • ईरान चाहता है कि उस पर होने वाले हमले और हत्याएं पूरी तरह बंद हों।
  • ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान के लिए हर्जाने की मांग की है।
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोनों देशों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि ने कहा है कि किसी भी बड़े हमले का जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा।

खाड़ी देशों की स्थिति और पिछले 24 घंटों के बड़े अपडेट

इस तनाव का असर सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों पर भी पड़ा है। पिछले 24 घंटों में युद्ध के मैदान में कई बड़ी घटनाएं हुई हैं जो नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है क्योंकि मिसाइल हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं।

देश/संस्था क्या हुआ अपडेट
अमेरिका ईरान के खर्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए।
इसराइल ईरान के आठ पुलों और एक पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया।
सऊदी अरब ईरान से आए कई मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
कुवैत नागरिकों के लिए घर के अंदर रहने की एडवाइजरी जारी की।
बहरीन सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब को जोड़ने वाला बड़ा पुल बंद किया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री रास्ते को खोलने के लिए लाया गया प्रस्ताव रूस और चीन ने वीटो कर दिया है। ईरान के राष्ट्रपति ने दावा किया है कि उनके लाखों नागरिक लड़ने के लिए तैयार हैं और वे पावर प्लांट जैसे जरूरी ठिकानों के आसपास इंसानी दीवार बनाएंगे। इस तनाव की वजह से समुद्री व्यापार और तेल की सप्लाई में बड़ी बाधा आ रही है जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।