ईरान ने दुनिया को साफ कर दिया है कि अब वह किसी के दबाव में नहीं आने वाला। ईरान के संसद के डिप्टी स्पीकर Ali Nikzad ने कहा कि Strait of Hormuz अब पहले जैसा नहीं रहेगा। यह आदेश सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता की तरफ से आया है और अब अमेरिका की धमकियों का कोई असर नहीं होगा।

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Strait of Hormuz पर ईरान का क्या नया प्लान है?

ईरान अब इस समुद्री रास्ते पर अपना नियंत्रण और सख्त करने जा रहा है। इसके लिए एक नया कानून लाने की तैयारी है। इस कानून के तहत कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं:

  • इसराइल से जुड़े जहाजों के आने पर पूरी तरह रोक लग सकती है।
  • अमेरिका जैसे देशों, जिन्हें ईरान अपना दुश्मन मानता है, उनके जहाजों को रास्ता नहीं दिया जाएगा।
  • बाकी अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अब ईरान से लिखित अनुमति लेनी होगी और वहां के नियमों का पालन करना होगा।
  • रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए अब सर्विस फीस भी तय की जाएगी।

ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इसराइल को क्या चेतावनी दी?

ईरान के कई बड़े अधिकारियों ने इस मामले पर अपनी बात रखी है। Deputy Speaker Ali Nikzad ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के वे दावे गलत हैं जिनमें कहा गया था कि अमेरिका इस रास्ते को दोबारा खोल देगा। वहीं, संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने बताया कि बाहरी दखल की वजह से अब इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल गई है। डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता Reza Talaei-Nik ने साफ कहा कि अमेरिका अब स्वतंत्र देशों को अपनी शर्तें नहीं थोप सकता और उसे अपनी गलत मांगें छोड़ देनी चाहिए।

यह विवाद क्यों शुरू हुआ और अब क्या स्थिति है?

यह पूरा तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया। इसके बाद 13 अप्रैल को अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर अपनी नौसेना के जरिए नाकाबंदी की कोशिश की। तब से ईरान ने यहाँ अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। 3 मई को Hormozgan प्रांत के दौरे के दौरान अली निकजाद ने कहा कि ईरान अपनी वर्तमान स्थिति को बरकरार रखेगा और स्थानीय लोग और सेना इसे नियंत्रित करेंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका Strait of Hormuz को फिर से खोल सकता है?

ईरान के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद के अनुसार अमेरिका की कोशिशें नाकाम रही हैं और यह रास्ता किसी भी हाल में अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा।

नए कानून से जहाजों पर क्या असर पड़ेगा?

इसराइल से जुड़े जहाजों पर बैन लग सकता है और अन्य अंतरराष्ट्रीय जहाजों को ईरान की अनुमति लेनी होगी साथ ही उन्हें ट्रांजिट फीस भी देनी होगी।