ईरान अब समुद्र के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से मोटा पैसा वसूलने की योजना बना रहा है. Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए जहाजों को अब भारी फीस देनी पड़ सकती है. इस कदम से ईरान को हर साल अरबों डॉलर की कमाई होने की उम्मीद है, जिससे दुनिया भर के व्यापार पर असर पड़ सकता है.

🗞️: Hormuz Strait New Rule: ईरान अब जहाजों से वसूलेगा अरबों डॉलर फीस, अमेरिका और सऊदी ने जताया कड़ा विरोध

Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस रणनीतिक रास्ते का फायदा उठाकर बड़ी रकम जुटाना चाहता है. ईरान का कहना है कि वह कोई ‘टोल’ नहीं ले रहा, बल्कि यह ‘समुद्री सेवा शुल्क’ (Maritime Service Fees) है. इसमें जहाजों को बचाने वाली सेवाओं, पायलट सर्विस और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के खर्च को शामिल किया गया है.

नियम और भुगतान का तरीका

ईरान ने इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को जिम्मेदारी सौंपी है. खबर है कि ईरान इन शुल्कों के भुगतान के लिए Bitcoin और USDT जैसी डिजिटल करेंसी स्वीकार कर रहा है, ताकि बैंकिंग सिस्टम की पाबंदियों से बचा जा सके. इसके अलावा, सभी जहाजों के लिए ईरान द्वारा मंजूर किया गया बीमा लेना अनिवार्य कर दिया गया है.

प्रमुख तारीखें और घटनाक्रम

तारीख क्या हुआ
30-31 मार्च 2026 Strait of Hormuz मैनेजमेंट प्लान अपनाया गया, IRGC को कमान मिली.
29 मई 2026 ईरान ने फीस लगाने के कानूनी आधार पर अपनी रिपोर्ट जारी की.
17 जून 2026 अमेरिका और ईरान के बीच MOU हुआ, जिसमें 60 दिनों तक मुफ्त रास्ता देने की बात कही गई.
18 जून 2026 ईरान ने घोषणा की कि 60 दिनों की बातचीत के बाद फीस लागू होगी.
23 जून 2026 ईरान और ओमान ने सेवाओं की लागत का अध्ययन करने पर सहमति जताई.
25 जून 2026 रिपोर्ट आई कि इससे सालाना 40 अरब डॉलर तक की कमाई हो सकती है.

दुनिया भर की प्रतिक्रिया

अमेरिका ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे ‘रेड लाइन’ बताया और कहा कि वह ऐसी किसी भी डील को स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें जहाजों से फीस ली जाए. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे गैरकानूनी और खतरनाक बताया है.

ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से मुफ्त और सुरक्षित रास्ते के पक्ष में है. सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने भी ईरान के इस कदम पर सवाल उठाए हैं और इसे अनावश्यक बताया है.

जहाजरानी कंपनी Maersk के CEO और IMO के महासचिव ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने ऐसा किया, तो दुनिया के अन्य समुद्री रास्तों पर भी दूसरे देश ऐसा कर सकते हैं, जिससे ग्लोबल शिपिंग में भारी समस्या खड़ी हो जाएगी.