ईरान अब समुद्र के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से मोटा पैसा वसूलने की योजना बना रहा है. Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने के लिए जहाजों को अब भारी फीस देनी पड़ सकती है. इस कदम से ईरान को हर साल अरबों डॉलर की कमाई होने की उम्मीद है, जिससे दुनिया भर के व्यापार पर असर पड़ सकता है.
Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस रणनीतिक रास्ते का फायदा उठाकर बड़ी रकम जुटाना चाहता है. ईरान का कहना है कि वह कोई ‘टोल’ नहीं ले रहा, बल्कि यह ‘समुद्री सेवा शुल्क’ (Maritime Service Fees) है. इसमें जहाजों को बचाने वाली सेवाओं, पायलट सर्विस और समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने के खर्च को शामिल किया गया है.
नियम और भुगतान का तरीका
ईरान ने इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को जिम्मेदारी सौंपी है. खबर है कि ईरान इन शुल्कों के भुगतान के लिए Bitcoin और USDT जैसी डिजिटल करेंसी स्वीकार कर रहा है, ताकि बैंकिंग सिस्टम की पाबंदियों से बचा जा सके. इसके अलावा, सभी जहाजों के लिए ईरान द्वारा मंजूर किया गया बीमा लेना अनिवार्य कर दिया गया है.
प्रमुख तारीखें और घटनाक्रम
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 30-31 मार्च 2026 | Strait of Hormuz मैनेजमेंट प्लान अपनाया गया, IRGC को कमान मिली. |
| 29 मई 2026 | ईरान ने फीस लगाने के कानूनी आधार पर अपनी रिपोर्ट जारी की. |
| 17 जून 2026 | अमेरिका और ईरान के बीच MOU हुआ, जिसमें 60 दिनों तक मुफ्त रास्ता देने की बात कही गई. |
| 18 जून 2026 | ईरान ने घोषणा की कि 60 दिनों की बातचीत के बाद फीस लागू होगी. |
| 23 जून 2026 | ईरान और ओमान ने सेवाओं की लागत का अध्ययन करने पर सहमति जताई. |
| 25 जून 2026 | रिपोर्ट आई कि इससे सालाना 40 अरब डॉलर तक की कमाई हो सकती है. |
दुनिया भर की प्रतिक्रिया
अमेरिका ने इस योजना का कड़ा विरोध किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे ‘रेड लाइन’ बताया और कहा कि वह ऐसी किसी भी डील को स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें जहाजों से फीस ली जाए. वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे गैरकानूनी और खतरनाक बताया है.
ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से मुफ्त और सुरक्षित रास्ते के पक्ष में है. सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने भी ईरान के इस कदम पर सवाल उठाए हैं और इसे अनावश्यक बताया है.
जहाजरानी कंपनी Maersk के CEO और IMO के महासचिव ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने ऐसा किया, तो दुनिया के अन्य समुद्री रास्तों पर भी दूसरे देश ऐसा कर सकते हैं, जिससे ग्लोबल शिपिंग में भारी समस्या खड़ी हो जाएगी.
