ईरान ने Strait of Hormuz पर अपना पूरा कंट्रोल जता दिया है. 1 जुलाई 2026 को एक विदेशी जहाज़ उनके बताए रास्ते से नहीं गया और इस वजह से वह समुद्र में फंस गया. अब ईरान ने साफ कर दिया है कि इस समुद्री रास्ते पर उनकी मर्ज़ी चलेगी और जो नियम नहीं मानेगा उसे परेशानी होगी.

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ईरान की सेना IRGC ने कड़े निर्देश दिए हैं कि जहाज़ों के लिए केवल वही रास्ते सुरक्षित हैं जिन्हें तेहरान ने मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि बिना तालमेल के जहाज़ चलाना पूरी तरह खतरनाक है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. इससे पहले 25 जून को भी चेतावनी दी गई थी कि अगर कमर्शियल जहाज़ बिना बताए रास्ता बदलते हैं, तो उनके साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने 1 जुलाई को बताया कि मौजूदा समझौते के तहत Strait of Hormuz से गुजरना केवल 60 दिनों तक मुफ्त रहेगा. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी और ईरान अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने जानकारी दी कि अमेरिकी पाबंदी खत्म होने के बाद ईरान ने 4 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल बेचा है, जिसकी कीमत 20 फीसदी ज्यादा मिली है.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि वे Strait of Hormuz में अपने हितों की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएंगे. उन्होंने साफ किया कि ओमान के साथ शिपिंग को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन फ्रांस या किसी और देश को इसमें दखल देने की ज़रूरत नहीं है. इसी तरह, विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी कहा कि किसी भी नए या अलग इंतज़ाम से तनाव और बढ़ेगा.

ईरान ने उन कोशिशों को भी ठुकरा दिया है जिसमें फ्रांस और ओमान ने समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने की पेशकश की थी. साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा ओमान के तट पर एक नया शिपिंग रूट बनाने के सुझाव को भी ईरान ने नकार दिया है.

पार्लियामेंट की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के चेयरमैन Ebrahim Azizi ने कहा कि Strait of Hormuz ईरान की संप्रभुता का हिस्सा है और इसका मैनेजमेंट सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के हाथ में रहेगा. हालांकि, भविष्य की सेवाओं और फीस पर चर्चा करने के लिए ओमान के साथ मिलकर एक ‘Strait of Hormuz Committee’ बनाने पर सहमति बनी है.