ईरान ने Strait of Hormuz के मैनेजमेंट के लिए एक नई अथॉरिटी बना दी है जिससे पूरी दुनिया में खलबली मच गई है. यूरोपीय संघ (EU) ने मांग की है कि इस रास्ते को जल्द से जल्द खोला जाए क्योंकि यह समुद्री व्यापार के लिए बहुत जरूरी है. अब यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की मर्जी और नए नियमों का पालन करना होगा, वरना उन्हें रास्ता नहीं मिलेगा.

ईरान के नए नियम और PGSA का कामकाज

ईरान ने 18 मई 2026 को Persian Gulf Strait Authority (PGSA) का गठन किया. अब कोई भी जहाज इस रास्ते से गुजरना चाहता है तो उसे ईमेल के जरिए आवेदन करना होगा. आवेदन में जहाज का मालिकाना हक, इंश्योरेंस, क्रू की लिस्ट और कार्गो की जानकारी देना जरूरी है. ईरान का कहना है कि समुद्री ट्रैफिक अब पुराने समय जैसा नहीं रहेगा.

  • इजराइल से जुड़े जहाजों के आने पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है.
  • अमेरिका और अन्य दुश्मन देशों के जहाजों के लिए सख्त पाबंदी रहेगी या उन्हें रास्ता नहीं दिया जाएगा.
  • परमिट मिलने के बाद एक तय फीस चुकानी होगी तभी जहाज आगे बढ़ पाएंगे.

जहाजों के लिए कितना होगा खर्चा और क्या है खतरा

खबरों के मुताबिक कुछ जहाजों को रास्ता देने के लिए 20 लाख डॉलर तक की फीस ली गई है, जिसका भुगतान चीनी युआन में किया गया. हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई रेट लिस्ट जारी नहीं हुई है. वहीं अमेरिका के OFAC ने पहले ही चेतावनी दी है कि ईरान को दिए गए इस पैसे की वजह से कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं.

विवरण जानकारी
नई अथॉरिटी PGSA
आवेदन का तरीका ईमेल (info@PGSA.ir)
अनुमानित फीस 20 लाख डॉलर तक (कुछ रिपोर्ट के अनुसार)
पेमेंट मोड चीनी युआन (Chinese Yuan)

EU और G7 देशों की प्रतिक्रिया

EU के इकोनॉमी कमिश्नर Valdis Dombrovskis ने साफ कहा है कि Strait of Hormuz को जल्द से जल्द खोलना होगा. पेरिस में G7 देशों के वित्त मंत्री इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं. EU का मानना है कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही की आजादी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. इस वजह से ईरान पर और ज्यादा प्रतिबंध लगाने पर सहमति बनी है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz पार करने के लिए नए नियम क्या हैं

अब जहाजों को PGSA को ईमेल भेजकर आवेदन करना होगा, जिसमें मालिकाना हक और कार्गो की जानकारी देनी होगी और फिर फीस भरकर परमिट लेना होगा.

किन जहाजों को रास्ता नहीं मिलेगा

इजराइल से जुड़े जहाजों पर पूरी तरह प्रतिबंध है, जबकि अमेरिका और अन्य विरोधी देशों के जहाजों को सख्त पाबंदियों का सामना करना पड़ेगा.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.