ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने Strait of Hormuz को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि यह केवल दुश्मन देशों के जहाजों के लिए बंद रहेगा। ईरान इसे अपना कानूनी अधिकार बता रहा है और उसने नेविगेशन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया है। इस फैसले का असर पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार और खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई पर पड़ रहा है।

किन देशों के जहाजों को मिलेगी आने-जाने की अनुमति?

ईरान ने उन देशों की स्थिति साफ कर दी है जिन्हें इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसमें भारत का नाम भी शामिल है, जो खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और वहां से होने वाले व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी है।

  • ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को रास्ता देने की अनुमति दी है।
  • इन देशों के जहाजों को ईरान की सेना के साथ तालमेल बिठाना होगा और अनुमति लेनी होगी।
  • जो देश इस तनाव या युद्ध का हिस्सा नहीं हैं, उनके लिए ईरान रास्ता खुला रखने की बात कह रहा है।
  • दुश्मन देशों और उनकी मदद करने वाले सहयोगियों के जहाजों को यहां से गुजरने नहीं दिया जाएगा।

समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर क्या असर पड़ा?

इस संकट की वजह से Strait of Hormuz में जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। सुरक्षा कारणों और हमलों के डर से ज्यादातर कंपनियों ने अपने जहाज इस रास्ते से भेजना कम कर दिया है।

विवरण ताजा आंकड़े
संकट से पहले रोजाना गुजरने वाले जहाज 130 से ज्यादा
मार्च 2026 में मौजूदा ट्रैफिक 3 से 4 जहाज रोजाना
ट्रैफिक में कुल कमी 97 प्रतिशत की गिरावट
इलाके में फंसे हुए जहाज और कर्मचारी 2,000 जहाज और 20,000 क्रू मेंबर्स

आंकड़ों के मुताबिक 12 मार्च 2026 तक व्यापारिक जहाजों पर 21 हमले होने की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हो सकता है क्योंकि यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। फिलहाल बड़ी संख्या में जहाज और उनके कर्मचारी इस इलाके में फंसे हुए हैं।