खलीज देशों के बीच स्थित Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए ईरान ने अब नियम सख्त कर दिए हैं। ईरानी राज्य टेलीविजन ने खबर दी है कि अब इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ तालमेल करना जरूरी होगा। इस फैसले से समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि Strait of Hormuz से निकलने वाले सभी विदेशी जहाजों को अब उनके द्वारा तय किए गए रास्तों पर ही चलना होगा। IRGC और पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने आदेश दिया है कि जहाजों को अब ईरान से परमिट लेना होगा और ईरान द्वारा मंजूर किया गया इंश्योरेंस भी साथ रखना होगा।
नियमों के मुताबिक, जो जहाज खाड़ी में दाखिल हो रहे हैं, उन्हें ईरान के हॉर्मुज़ आइलैंड के दक्षिण से गुजरना होगा। वहीं, बाहर जाने वाले जहाजों को लारक आइलैंड के दक्षिण से निकलना होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि इन रास्तों के अलावा किसी भी दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करना पूरी तरह मना है।
जहाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री चैनल 16 के जरिए IRGC के साथ संपर्क करना अनिवार्य कर दिया गया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज इस नियम को नहीं मानता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच, ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून 2026 को एक समझौता (MoU) हुआ था। इसके तहत ईरान ने 60 दिनों के लिए कमर्शियल जहाजों को बिना किसी फीस के सुरक्षित रास्ता देने की बात मानी थी। इस दौरान सुरक्षा, पर्यावरण सेवाओं और बीमा का खर्च ईरानी सरकार खुद उठाएगी। इस समझौते के बाद जहाजों का संचालन फिर से शुरू करने की बात कही गई थी।
तनाव तब और बढ़ गया जब 27 जून को एक पनामा के झंडे वाले टैंकर पर हमला हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने इसके लिए IRGC को जिम्मेदार ठहराया, जबकि ईरान का कहना है कि जहाज ने तय रास्ते का पालन नहीं किया था। इसके बाद अमेरिकी कमांड (CENTCOM) ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए हैं।
ओमान ने भी अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर एक नया रास्ता बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान ने इसे खतरनाक बताते हुए खारिज कर दिया। फिलहाल, इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से कम बनी हुई है।
