ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि अगर समुद्री रास्तों को लेकर सही तालमेल नहीं रहा, तो वहां जहाजों का सुरक्षित निकलना मुश्किल होगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह उन रास्तों या फैसलों को नहीं मानेगा जिनमें उसकी सलाह नहीं ली गई है।

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ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA और IRGC ने 25 और 26 जून 2026 को यह चेतावनी दी। IRGC ने कहा कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई जहाज इन रास्तों से हटकर चलता है, तो उसे बहुत खतरनाक माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ओमान और IMO के फैसले पर नाराजगी

ईरान की यह सख्ती इसलिए आई क्योंकि ओमान के परिवहन मंत्रालय ने International Maritime Organization (IMO) के साथ मिलकर कुछ नए शिपिंग रूट तय किए थे। ईरान का कहना है कि इन नए रास्तों को बनाने से पहले उनसे कोई बात नहीं की गई, इसलिए यह फैसला पूरी तरह गलत और खतरनाक है। ईरान ने निर्देश दिया है कि सभी जहाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री चैनल 16 के जरिए IRGC नेवी से तालमेल करना ज़रूरी है।

इस्लामाबाद मेमोरेंडम और नए नियम

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीब आबादी ने बताया कि समुद्री सुरक्षा के लिए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ के आर्टिकल 5 का पालन करना होगा। इस समझौते पर 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षर हुए थे ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। इस नियम के मुताबिक, ईरान और ओमान मिलकर तय करेंगे कि जलमार्ग का प्रबंधन कैसे होगा।

शुरुआत में इस रास्ते को 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों के लिए टोल-फ्री (बिना शुल्क) रखा गया था। लेकिन ईरान ने संकेत दिए हैं कि इस समय सीमा के बाद वह जहाजों से सर्विस फीस लेगा, जिस पर अमेरिका ने अपनी आपत्ति जताई है।

जहाज पर हमला और फंसे हुए नाविक

तनाव के बीच 25 जून 2026 को ‘Ever Lovely’ नाम के सिंगापुर झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर हमला हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले के लिए ईरान की IRGC को ज़िम्मेदार ठहराया है। इस हमले के बाद IMO ने खाड़ी में फंसे 11,000 से ज़्यादा नाविकों को निकालने का अपना प्रोग्राम कुछ समय के लिए रोक दिया है, जब तक कि सुरक्षा की पूरी गारंटी नहीं मिल जाती।

समुद्री डेटा से पता चला है कि हालांकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हुई है, लेकिन यह युद्ध से पहले के स्तर से कम है। 26 जून को इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पिछले दिनों के मुकाबले कम रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.