ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कुछ खास जहाजों पर 20 लाख डॉलर (करीब 2 मिलियन डॉलर) का भारी शुल्क लगाना शुरू कर दिया है। यह जानकारी ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य अलाउद्दीन बरुजर्दी (Alaeddin Boroujerdi) ने दी है। उन्होंने इसे एक नई संप्रभु व्यवस्था बताया है जो दशकों बाद लागू की गई है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शिपिंग कंपनियों के बीच हलचल मचा दी है क्योंकि यह मार्ग तेल सप्लाई के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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ईरान ने यह शुल्क क्यों लगाया और इसका क्या कारण है?

अलाउद्दीन बरुजर्दी के अनुसार यह शुल्क ‘युद्ध की लागत’ को कवर करने के लिए वसूला जा रहा है। उन्होंने एक टीवी प्रोग्राम में बताया कि ईरान ने 47 साल बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता की एक नई अवधारणा पेश की है। उनके मुताबिक कुछ चुनिंदा जहाजों से यह वसूली पहले ही शुरू की जा चुकी है। मार्च 2026 की शुरुआत में ही ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर नेविगेशन को सीमित कर दिया था। ईरान ने यह चेतावनी भी दी थी कि बिना तालमेल के गुजरने वाले किसी भी जहाज पर कार्रवाई की जा सकती है।

घटनाक्रम और दावों में विरोधाभास की पूरी जानकारी

तारीख मुख्य घटनाक्रम
24 मार्च 2026 बरुजर्दी ने कहा कि यह कदम ईरान का एक नया रणनीतिक दृष्टिकोण है।
23 मार्च 2026 भारत में ईरानी दूतावास ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि यह केवल व्यक्तिगत राय है।
22 मार्च 2026 संसद सदस्य ने सार्वजनिक रूप से 2 मिलियन डॉलर शुल्क वसूलने की बात कही।
मार्च 2026 शुरू ईरान ने अमेरिकी और इजरायली कार्रवाइयों के जवाब में रास्ते को प्रतिबंधित करने की घोषणा की।

शिपिंग कंपनियों और प्रवासियों पर क्या असर होगा?

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। अगर यह शुल्क पूरी तरह लागू होता है तो शिपिंग और बीमा की लागत काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर खाड़ी देशों (Gulf Countries) से भारत और अन्य देशों में आने वाली जरूरी चीजों के दामों पर पड़ सकता है। हालांकि ईरान के आधिकारिक दूतावास ने इन खबरों को निराधार बताया है, लेकिन संसद सदस्य के बयानों ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। जो लोग खाड़ी देशों में व्यापार करते हैं या लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े हैं, वे इन बदलावों पर करीबी नजर रख रहे हैं।