ईरान की संसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर शुल्क यानी टोल टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए एक नया कानून तैयार किया जा रहा है जिसे अगले हफ्ते अंतिम रूप दिया जा सकता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस सप्लाई रूट्स में गिना जाता है। ईरान इस कदम के जरिए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को कानूनी रूप देना चाहता है।

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क्यों लगाया जा रहा है यह टोल टैक्स?

ईरान की संसद इस ड्राफ्ट बिल पर काम कर रही है ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने अधिकार को और मजबूत कर सके। वर्तमान में अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों का आना-जाना काफी कम हो गया है। अब केवल वही जहाज यहां से गुजर रहे हैं जिन्हें विशेष अनुमति मिली है या जिनका संबंध ईरान, भारत और चीन जैसे देशों से है। इस नए कानून के लागू होने के बाद यहां से गुजरने वाले हर व्यावसायिक जहाज को तय शुल्क देना होगा।

वैश्विक व्यापार और भारत पर इसका क्या असर होगा?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी कुछ खास बातें इस प्रकार हैं जो वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं:

  • यह दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी कॉरिडोर है जहां से खाड़ी देशों का तेल और गैस सप्लाई होता है
  • भारत और चीन जैसे देशों के लिए यह रूट समुद्री व्यापार के नजरिए से बहुत जरूरी है
  • नया टोल लगने से माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है
  • फिलहाल सुरक्षा कारणों से इस रास्ते पर ट्रैफिक काफी कम है और इसे बेहद संवेदनशील माना जा रहा है

इस कदम से ईरान वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता है। अगर यह कानून पास हो जाता है तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को इस रास्ते का उपयोग करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com