ईरान ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए फीस वसूलने का ऐलान किया है. ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने साफ किया कि मुफ्त रास्ता मिलने की समय सीमा खत्म होने के बाद अब जहाजों को सर्विस चार्ज देना होगा. इस खबर के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच नए विवाद की स्थिति बन सकती है.
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ईरान के संसद स्पीकर और मुख्य negotiator Mohammad Bagher Ghalibaf ने 18 जून 2026 को एक टीवी संबोधन में कहा कि Strait of Hormuz अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि 60 दिनों की मुफ्त आवाजाही की अवधि खत्म होने के बाद, अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत जहाजों से ट्रांजिट सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाएगा. Ghalibaf ने यह बात 17 जून को राज्य टीवी को दिए एक इंटरव्यू में भी दोहराई थी.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने 15 जून 2026 को इस बारे में और जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई टोल टैक्स नहीं है, बल्कि यह ‘सर्विस फीस’ है. यह पैसा नेविगेशन सहायता, पर्यावरण की सुरक्षा और बीमा कवर जैसी सुविधाओं के बदले लिया जाएगा. ईरान का कहना है कि एक तटीय देश होने के नाते उसे ये शुल्क लेने का पूरा अधिकार है.
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता
हाल ही में राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध खत्म करने के लिए एक डिजिटल समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- व्यावसायिक जहाजों के लिए 60 दिनों तक मुफ्त रास्ता दिया जाएगा.
- ईरान ने Strait of Hormuz को तुरंत फिर से खोलने का फैसला किया.
- अमेरिका ने 30 दिनों के भीतर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का वादा किया.
- ईरान इस रास्ते के भविष्य के मैनेजमेंट के लिए ओमान जैसे देशों से सलाह करेगा.
दूसरी तरफ, अमेरिका की इस पर अलग राय है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने 15 जून 2026 को कहा कि अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता लंबे समय तक बिना किसी टोल या फीस के खुला रहे. ईरान के ‘सर्विस फीस’ वाले फैसले से अमेरिका सहमत नहीं है.
वर्तमान स्थिति यह है कि रास्ते से बारूद और रुकावटें हटाने का काम चल रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी धीमी और महंगी है. इस वजह से जहाजों के लिए अभी भी खतरा बना हुआ है. यही कारण है कि शिपिंग और बीमा कंपनियां अभी पूरी तरह से सामान्य कामकाज शुरू करने में हिचकिचा रही हैं क्योंकि उन्हें सुरक्षा का पूरा भरोसा नहीं है.