ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर भारी फीस लगाने का ऐलान किया है। ईरानी सांसद अलाउद्दीन बोरुजेर्दी ने 22 मार्च 2026 को पुष्टि की कि कुछ जहाजों से अब प्रति चक्कर लगभग 20 लाख डॉलर यानी करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक वसूले जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि यह नया नियम ‘युद्ध की लागत’ और इलाके पर अपना संप्रभु अधिकार जताने के लिए लागू किया गया है।

किन जहाजों को मिलेगी इजाजत और क्या है शर्त?

ईरान के इस नए समुद्री कानून के तहत जहाजों के गुजरने के लिए कुछ खास शर्तें रखी गई हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान और आईएमओ (IMO) में ईरान के प्रतिनिधि अली मौसवी ने इस स्थिति पर स्पष्ट जानकारी दी है।

  • यह रास्ता केवल उन देशों के लिए खुला रहेगा जो ईरान के दुश्मन नहीं हैं।
  • जहाजों को वहां से गुजरने के लिए ईरानी अधिकारियों और IRGC के साथ सुरक्षा तालमेल करना होगा।
  • ईरानी संसद के सदस्यों का कहना है कि ट्रांजिट फीस वसूलना एक सामान्य अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है जिससे देश की कमाई बढ़ेगी।
  • ईरान तेल टैंकरों से भुगतान के लिए चीनी युआन (Chinese Yuan) के इस्तेमाल पर विचार कर रहा है ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से बचा जा सके।

भारत और वैश्विक व्यापार पर इस फैसले का क्या होगा असर?

होर्मुज का रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट में से एक है और यहां ईरान की सख्ती से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। कई देश अपने जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और सीधी बातचीत का सहारा ले रहे हैं।

देश मौजूदा स्थिति
भारत और पाकिस्तान अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान के साथ सीधी बातचीत कर रहे हैं।
अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रास्ता न खोलने पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।
G7 देश ईरान के इस कदम को गैर-वाजिब बताते हुए इसकी निंदा की है।
भारतीय जहाज हाल ही में कुछ भारतीय LPG जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति मिली है।

मार्च की शुरुआत से ही इस रास्ते पर आवाजाही प्रभावित होने के कारण ईंधन की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत, चीन और मलेशिया जैसे देश लगातार इस कोशिश में हैं कि उनके व्यापारिक जहाजों को बिना किसी बाधा के निकलने दिया जाए।