ईरान ने समुद्र के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों के लिए एक नया और सख्त नियम लागू किया है. अब Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को भारी फीस देनी होगी, वरना उन्हें रास्ते में ही रुकना पड़ेगा. इस फैसले से पूरी दुनिया के व्यापार और सामान की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है और कई जहाज पहले से ही समुद्र में फंसे हुए हैं.

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ईरान का नया टोल सिस्टम और लगने वाला खर्चा

ईरान सरकार ने इस काम के लिए एक नई संस्था बनाई है जिसे Persian Gulf Straits Authority (PGSA) कहा गया है. अब किसी भी जहाज को इस रास्ते से गुजरने के लिए PGSA से मंजूरी लेनी होगी. इसके लिए जहाजों को अपनी ओनरशिप, इंश्योरेंस और सामान की पूरी जानकारी ईमेल के जरिए भेजनी होगी. मंजूरी मिलने के बाद उन्हें एक तय फीस चुकानी होगी.

इस फीस की राशि बहुत ज्यादा है और कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक मांगे गए हैं. यह भुगतान चीनी युआन या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किया जा रहा है. हालांकि, रूस और चीन जैसे मित्र देशों को इस फीस से छूट दी गई है. भारत, पाकिस्तान और इराक के साथ भी ईरान के द्विपक्षीय समझौते हैं, इसलिए उन्हें भी यह टोल नहीं देना होगा.

विवरण जानकारी/राशि
प्रति जहाज फीस 1 मिलियन से 2 मिलियन डॉलर
फंसे हुए जहाजों की संख्या लगभग 1,500
संभावित वार्षिक कमाई (शुरुआती) 3 बिलियन डॉलर
संभावित अधिकतम कमाई 60 से 100 बिलियन डॉलर
भुगतान का तरीका चीनी युआन या क्रिप्टोकरेंसी

अमेरिका की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय नियम

अमेरिका ने ईरान के इस कदम का कड़ा विरोध किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि जो कंपनियां ईरान को यह फीस देंगी, उन पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. अमेरिका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को रोका नहीं जा सकता और न ही उनसे टोल वसूला जा सकता है.

दूसरी तरफ, ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी सैन्य जहाज बिना अनुमति के यहां से नहीं गुजर सकेगा. ईरान ने इन शुल्कों को सुरक्षा शुल्क बताया है, जो जहाजों और इंटरनेट केबल्स की रक्षा के लिए लिया जा रहा है. इस विवाद की वजह से कई कमर्शियल जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के इस नए टोल नियम से किन देशों को छूट मिली है

रूस और चीन को पूरी छूट दी गई है. इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और इराक के साथ भी ईरान के विशेष समझौते हैं, इसलिए उन्हें यह टोल टैक्स नहीं देना होगा.

अमेरिका ने टोल फीस भरने वाली कंपनियों को क्या चेतावनी दी है

U.S. Office of Foreign Assets Control (OFAC) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़ी संस्थाओं को भुगतान करने वाली गैर-अमेरिकी कंपनियों पर सेकेंडरी सेंक्शन यानी कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.