ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर भारी फीस लगाने की योजना बनाई है। इस फैसले से पूरी दुनिया के व्यापार और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। ईरान का कहना है कि वह सुरक्षा और पर्यावरण सेवाओं के नाम पर यह पैसा वसूलेगा।
ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने बताया कि इस रास्ते का मैनेजमेंट अब पहले जैसा नहीं रहेगा। ईरान इस योजना के जरिए हर साल लगभग 40 अरब डॉलर तक की कमाई करने की उम्मीद कर रहा है। इस काम के लिए वह तुर्की के ‘गोल्ड फ्रैंक’ टैक्स जैसा मॉडल अपनाने पर विचार कर रहा है और इस बारे में चीन और खाड़ी देशों से बात कर रहा है।
इस खबर के बाद अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देशों में काफी नाराजगी है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक किसी भी देश को ऐसे अंतरराष्ट्रीय रास्तों पर टोल या फीस लगाने का हक नहीं है। राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मुद्दे को ‘रेड लाइन’ बताया है और चेतावनी दी है कि अगर फीस लागू हुई तो वह ईरान के साथ चल रही बातचीत को खत्म कर देंगे।
इस पूरे मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| संभावित सालाना कमाई | 40 अरब डॉलर |
| टोल फ्री समय | 60 दिन (MOU के तहत) |
| आधारित कानून | UNCLOS 1982 |
| प्रस्तावित मॉडल | तुर्की का गोल्ड फ्रैंक टैक्स |
| अमेरिका का रुख | पूरी तरह विरोध (रेड लाइन) |
| सऊदी अरब का रुख | पूर्ण विरोध |
| ओमान का रुख | अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन |
सऊदी अरब ने भी इस योजना का कड़ा विरोध किया है और कहा है कि पहले यह रास्ता बिना किसी समस्या के चल रहा था। वहीं, Oman और ईरान ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति जताई है, लेकिन ओमान के विदेश मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वह बिना टोल के रास्ता देने के पक्ष में हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि 1982 के UNCLOS कानून के तहत जहाजों को अंतरराष्ट्रीय रास्तों से ‘ट्रांजिट पैसेज’ का अधिकार है। इसका मतलब है कि सामान्य आवाजाही के लिए कोई भी देश टोल या फीस नहीं वसूल सकता। हालांकि ईरान ने इस कानून पर कुछ आपत्तियां जताई हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे उसे रास्ता बंद करने या फीस वसूलने का कानूनी हक नहीं मिलता।
