ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते Strait of Hormuz के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को भारी ट्रांजिट फीस देनी होगी। हालांकि रूस जैसे करीबी देशों को इस खर्चे से पूरी तरह छूट दी गई है। अमेरिका और इसराइल के साथ तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने यह बड़ा फैसला लिया है।

Strait of Hormuz से गुजरने का नया किराया और नियम क्या हैं?

ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए फीस अनिवार्य कर दी है। सुरक्षा खर्चों को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। नए नियमों के मुताबिक जहाजों को करीब 20 लाख डॉलर (2 million dollars) देने होंगे। यह भुगतान युआन या क्रिप्टोकरेंसी में लिया जाएगा। अमेरिका और इसराइल से जुड़े जहाजों का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

रूस को मिली छूट और फीस से कमाई की स्थिति क्या है?

ईरान के रूस स्थित राजदूत Kazem Jalali ने कन्फर्म किया है कि रूस और कुछ अन्य मित्र देशों को इस फीस से छूट दी गई है। ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर Hamid Reza Haji Babaei ने बताया कि सरकार ने पहली बार इन क्रॉसिंग फीस से कमाई शुरू कर दी है और पैसा सेंट्रल बैंक में जमा हो गया है। इसके अलावा ईरान और ओमान मिलकर जहाजों की निगरानी के लिए एक नया प्रोटोकॉल तैयार कर रहे हैं।

जहाजों की जब्ती और सुरक्षा को लेकर क्या खतरा है?

तनाव के बीच ईरान ने दो कंटेनर जहाजों, Epaminondas और MSC Francesca को जब्त किया है। ईरान का कहना है कि यह अमेरिका द्वारा लगाए गए नेवल ब्लॉकेड का जवाब है। दूसरी तरफ पेंटागन ने बताया है कि समुद्र में बारूदी सुरंगें (mines) बिछाई गई हैं जिन्हें हटाने में 6 महीने तक का समय लग सकता है। UN की शिपिंग एजेंसी ने नाविकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है क्योंकि कई जहाजों को निशाना बनाया गया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.