ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करके पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। इस कदम के बाद अमेरिका अब बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो गया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच शांति वार्ता शुरू हुई है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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इस्लामाबाद में क्या हो रहा है और ईरान का क्या रुख है?

11 अप्रैल 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance अपनी टीम के साथ इस्लामाबाद पहुंचे। वहां ईरान के प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी मुलाकात हुई। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ किया कि वे “जीरो ट्रस्ट” यानी बिना किसी भरोसे के बातचीत कर रहे हैं क्योंकि अमेरिका ने पुराने वादे पूरे नहीं किए। ईरान ने अपनी शर्तों में इजराइल द्वारा लेबनान पर हमले रोकने और अपनी जमी हुई संपत्ति वापस लेने की मांग रखी है।

Strait of Hormuz और बारूदी सुरंगों का खतरा

राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि यह रास्ता जल्द खुलेगा, चाहे ईरान मदद करे या न करे। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान खुद भी इसे पूरी तरह खोलने में असमर्थ है। वजह यह है कि ईरान ने पानी में जो बारूदी सुरंगें (naval mines) बिछाई थीं, उन्हें ढूंढना और हटाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। IRGC ने जहाजों को सुरक्षित रास्ता बताने वाले चार्ट जारी किए हैं ताकि हादसे न हों।

आर्थिक असर और ईरान की नई मांगें

इस रास्ते के बंद होने से तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है। IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है जिसमें इस जलमार्ग पर नियंत्रण बनाए रखने की बात कही गई है। ईरान ने हर जहाज से 20 लाख डॉलर तक का ट्रांजिट शुल्क लेने का प्रस्ताव दिया है, जिसे वह ओमान के साथ बांट सकता है।