मिडल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 21 जुलाई 2026 को ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स) ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी बेस पर हमले का दावा किया है। इस हमले में एक मिसाइल डिफेंस रडार और एक F-15 फाइटर जेट पूरी तरह से नष्ट हो गया है। यह हमला ईरान के ऑपरेशन नसर-2 का हिस्सा है।
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हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत
अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि 18 जुलाई 2026 को हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में फर्स्ट लेफ्टिनेंट टायलर जेम्स फीहन और प्राइवेट इसाबेला गोंजालेज की जान चली गई है। एक और सैनिक लापता है। यह पहली बार है जब ईरान के हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है। इसके जवाब में अमेरिका लगातार 10 दिनों से ईरान पर जवाबी हमले कर रहा है।
जॉर्डन का रुख और सुरक्षा अलर्ट
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने साफ किया है कि देश में अमेरिकी सेना केवल आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए मौजूद है और जॉर्डन अपनी संप्रभुता का पूरा सम्मान करता है। 17 जुलाई को जॉर्डन ने अपनी सीमा में ईरान की 3 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया था। वहीं, 20 जुलाई को अमेरिकी दूतावास ने अकाबा एयरपोर्ट और बंदरगाह पर किसी बड़े खतरे की आशंका जताते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इससे पहले ईरान ने अकाबा एयरपोर्ट पर C-17 और P-8 विमानों को भी निशाना बनाने का दावा किया था।
