ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मंगलवार 21 जुलाई 2026 को कुवैत के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इस हमले को ऑपरेशन Nasr 2 का 24वां चरण बताया गया है। IRGC के मुताबिक, इन हमलों में अली अल-सलेम बेस के पास एक राडार, बूबियन द्वीप पर मौजूद सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा ढांचों को निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि ये हमले अमेरिकी सेना की गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं।
कुवैत और अन्य देशों की कड़ी प्रतिक्रिया
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। कुवैत के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराया। कुवैती अधिकारियों ने जनता से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है। कतर ने भी इस घटना पर चिंता जताते हुए क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने की मांग की है।
हमले में निशाने पर रहे प्रमुख सैन्य अड्डे
ईरान ने दावा किया है कि इस हमले में निम्नलिखित संपत्तियों को निशाना बनाया गया:
- Ali Al-Salem Air Base पर मौजूद MQ-9 Reaper ड्रोन का हैंगर और राडार सिस्टम।
- Camp Arifjan में प्रशासनिक इमारतें और एंटीना।
- Camp Al Udairi में हेलीकॉप्टर पार्किंग एरिया।
- Ahmad Al Jaber Air Base में अमेरिकी सैनिकों के रहने की जगह।
हालांकि अमेरिका की CENTCOM ने 20 जुलाई 2026 को ईरान पर जवाबी हमले की पुष्टि की थी, लेकिन उन्होंने कुवैत में हुए नुकसान के दावों पर अभी कोई जानकारी नहीं दी है। जून में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है।
