ईरान ने शनिवार रात और रविवार सुबह के बीच कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया. इस हमले की जिम्मेदारी ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ली है. ईरान का कहना है कि उसने अमेरिका की आठ अहम जगहों को निशाना बनाया और उन्हें तबाह कर दिया.
इन जगहों पर हुआ हमला
ईरान ने मुख्य रूप से कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस (Ali al-Salem airbase) और बहरीन के पोर्ट सलमान (Port Salman) में स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस को निशाना बनाया. ये हमले अमेरिका द्वारा ईरान में किए गए हवाई हमलों के जवाब में किए गए.
अमेरिका ने क्यों किया था हमला
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने शुक्रवार और रविवार को ईरान के सिरीक, बंदर-ए लेंगेह और केशम द्वीप पर हमला किया था. अमेरिका ने कहा कि यह कार्रवाई एक पनामा-ध्वज वाले टैंकर ‘किकु’ (Kiku) पर हुए ईरानी ड्रोन हमले का जवाब थी. इस टैंकर में कतर की सरकारी कंपनी के लिए करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जाया जा रहा था.
नुकसान की जानकारी
बहरीन के आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास एक आठ मंजिला रिहायशी इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है, लेकिन किसी की जान नहीं गई. कुवैत की सेना ने दो बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया, लेकिन ड्रोन हमले से कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुछ भौतिक नुकसान हुआ है. अमेरिका ने अभी तक अपने किसी सैनिक के मारे जाने या बेस को बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है.
सीजफायर पर संकट
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की कड़ी निंदा की है. ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने पिछले हफ्ते साइन हुए सीजफायर समझौते को तोड़ दिया है. ईरान ने कहा कि अमेरिका की बमबारी और दक्षिणी लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई इस समझौते का उल्लंघन है. इन घटनाओं की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच का शांति समझौता अब खतरे में पड़ गया है.
