ईरान ने अमेरिका और इसराइल द्वारा आम लोगों पर किए गए हमलों के सबूत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सौंप दिए हैं। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) ने दावा किया है कि इन हमलों में हजारों घर और अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गए हैं। अब इस पूरे मामले को इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) और अन्य वैश्विक निकायों तक ले जाया गया है।
हमलों में कितना जान-माल का नुकसान हुआ
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने हमले के बाद के आंकड़े जारी किए हैं, जो काफी डराने वाले हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
- कुल मौतें: कम से कम 1,255 लोग मारे गए, जिनमें 200 बच्चे और 11 स्वास्थ्य कर्मी शामिल हैं।
- घायल: 12,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें से ज्यादातर को जलने और दबने की गंभीर चोटें आई हैं।
- संपत्तियों का नुकसान: करीब 81,365 नागरिक यूनिट्स को नुकसान पहुंचा है, जिसमें घर, स्कूल, कमर्शियल दुकानें और मेडिकल सेंटर शामिल हैं।
ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के प्रमुख Pir Hossein Kolivand ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय नियमों और जिनेवा कन्वेंशन का गंभीर उल्लंघन बताया है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या कदम उठाए
इस मामले को वैश्विक स्तर पर उठाने के लिए ईरान ने कई औपचारिक कदम उठाए हैं ताकि हमलावर देशों पर दबाव बनाया जा सके:
- ICC को पत्र: IRCS की डिप्टी हेड Razieh Alishvandi ने बताया कि इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) और अन्य अधिकारियों को 16 औपचारिक पत्र भेजे गए हैं।
- UN में शिकायत: ईरान के UN राजदूत Amir Saeid Iravani ने सुरक्षा परिषद (UNSC) में आरोप लगाया कि अमेरिका और इसराइल ने जानबूझकर नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।
- बुनियादी सेवाओं पर हमला: राजदूत ने बताया कि ईंधन भंडारण केंद्रों और ताजे पानी के प्लांट पर हमलों की वजह से लोगों को पानी की किल्लत और प्रदूषण का सामना करना पड़ा है।
वहीं International Committee of the Red Cross (ICRC) के ईरान प्रमुख Vincent Cassard ने भी इस मानवीय संकट और नागरिक मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिकों और जरूरी सेवाओं को हमलों से बचाना अनिवार्य है।