ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei को शुक्रवार, 9 जुलाई 2026 को उनके गृहनगर Mashhad में दफनाया गया। इस अंतिम विदाई समारोह में हजारों लोग शामिल हुए। उनकी मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों में हुई थी, जिसकी पुष्टि ईरानी सरकार ने 1 मार्च 2026 को की थी।
अंतिम संस्कार की रस्में Dar al-Dhikr प्रार्थना हॉल में पूरी की गईं। इस दौरान उनके ताबूत को Imam Reza के मकबरे के चारों ओर घुमाया गया। मश्हद में दफनाने से पहले उनके ताबूत को पूरे देश में ले जाया गया। इसके अलावा इराक के पवित्र शहरों Najaf और Karbala में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। साल 1747 में Nader Shah के बाद वह ईरान के दूसरे ऐसे शासक बने हैं जिन्हें मश्हद में दफनाया गया है।
ईरानी अधिकारियों ने इस बड़ी भीड़ को इस्लामिक रिपब्लिक की लोकप्रियता और ताकत के रूप में पेश किया। Qom के शुक्रवार प्रार्थना नेता Ayatollah Mohammad Saidi ने इस आयोजन को इस्लामिक रिपब्लिक के लिए एक जनमत संग्रह जैसा बताया। इस मौके पर पाकिस्तान, क्यूबा, इराक, ओमान, सर्बिया और कतर जैसे देशों के विदेशी प्रतिनिधि और ईरान के अन्य बड़े नेता मौजूद थे।
अंतिम प्रार्थना की अगुवाई खामेनेई के सबसे बड़े बेटे Mostafa Hosseini Khamenei ने की। हालांकि, नए सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei इस कार्यक्रम में नजर नहीं आए। Mojtaba को 9 मार्च 2026 को इस पद के लिए चुना गया था। अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक वह उसी हमले में घायल हुए थे जिसमें उनके पिता की मौत हुई, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है। यह पूरा घटनाक्रम अमेरिका के साथ युद्धविराम की खबरों के बीच सामने आया है।
