ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू हो गई है। उनके पार्थिव शरीर को ईरान से पड़ोसी देश इराक ले जाया जा रहा है। शिया मुसलमानों के लिए इराक के कुछ शहर सबसे पवित्र माने जाते हैं, इसलिए वहां उनकी बॉडी ले जाने का फैसला किया गया है।

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अंतिम यात्रा का पूरा शेड्यूल

अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी, जो 9 जुलाई तक चलेगी। इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए गए हैं:

  • तेहरान: ग्रैंड मुसल्ला में जनता के दर्शन के बाद 10 किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला गया।
  • कोम: यहां धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी।
  • इराक: 7 जुलाई की शाम को पार्थिव शरीर नजफ पहुंचेगा और 8 जुलाई को नजफ और कर्बला में यात्रा निकाली जाएगी।
  • मशहद: अंत में उन्हें उनके जन्मस्थान मशहद में दफनाया जाएगा।

इराक ले जाने की वजह और धार्मिक महत्व

खामेनेई को शिया समुदाय का सर्वोच्च नेता माना जाता है। शिया इस्लाम में मक्का और मदीना के बाद नजफ और कर्बला का बहुत ऊंचा दर्जा है। नजफ में पहले इमाम और पैगंबर मोहम्मद के दामाद हजरत अली का मकबरा है, जो सोने से मढ़ा हुआ है। दुनिया भर से जायरीन यहां आते हैं और इसी कब्रिस्तान में दफन होने की ख्वाहिश रखते हैं।

युद्ध के बीच अंतिम विदाई

अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के लोग 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध के दौरान मारे गए थे। तब से उनकी बॉडी को सुरक्षित रखा गया था। युद्ध थमने के बाद अब यह यात्रा निकाली जा रही है। उनके ताबूत को एक बड़े खुले ट्रक पर रखा गया है, जिसे किसी दरगाह की तरह सजाया गया है। सड़कों पर ईरानी झंडे और मातम करते लोगों की भारी भीड़ जमा है।

दिलचस्प बात यह है कि ईरान और इराक कभी एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन थे और दोनों के बीच 8 साल तक जंग चली थी, लेकिन धार्मिक आस्था के कारण अब यह यात्रा संभव हो पाई है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.