ईरान की राजधानी तेहरान के ग्रैंड मोसाल्ला कॉम्प्लेक्स में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए लाखों लोग जमा हुए हैं। शहर में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने यातायात के कड़े नियम लागू किए हैं। यह आयोजन देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कार के रूप में देखा जा रहा है।
अंतिम संस्कार का पूरा शेड्यूल
- 3 से 5 जुलाई 2026: तेहरान के ग्रैंड मोसाल्ला में शरीर को रखा गया है, जहां लोग दर्शन कर रहे हैं।
- 6 जुलाई 2026: तेहरान में एक बड़ा सार्वजनिक जुलूस और समारोह आयोजित होगा।
- 7 जुलाई 2026: धार्मिक रस्में पवित्र शहर কোম में होंगी, जिसके बाद शव को इराक के नजफ और कर्बला ले जाया जाएगा।
- 9 जुलाई 2026: मशहद के इमाम रज़ा मंदिर में अंतिम संस्कार और दफन की प्रक्रिया पूरी होगी।
अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या 28 फरवरी 2026 को हुई थी। 2026 के ईरान युद्ध की वजह से उनके अंतिम संस्कार में देरी हुई। उनके साथ उनकी बेटी, दामाद और 14 महीने की पोती की भी जान गई थी, जिनका शव भी उनके साथ रखा गया है।
शहर में पाबंदियां और सुरक्षा
भीड़ को संभालने के लिए सरकार ने शनिवार 4 जुलाई से सोमवार 6 जुलाई तक तेहरान के सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तर बंद रखे हैं। शहर के बीच के इलाकों में निजी गाड़ियों का जाना मना है, जिसकी वजह से कई लोग पैदल चलकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच रहे हैं। हवाई यातायात पर भी असर पड़ा है। मेहराबाद एयरपोर्ट शुक्रवार सुबह से पूरी तरह बंद रहा, जबकि इमाम खुमैनी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम जारी है। 6 जुलाई को तेहरान का हवाई क्षेत्र पूरी तरह बंद रहेगा।
दुनियाभर से पहुंचे मेहमान
इस मौके पर 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। भारत की तरफ से केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्र मार्गरीता और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल हुए हैं। इनके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के हे वेई, रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव और अफगानिस्तान के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
अधिकारियों के बयान
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने लोगों से बड़ी संख्या में आने की अपील की है। IRGC के कमांडर जनरल अहमद वहिदी ने कहा कि दुश्मन इस देश को सरेंडर करते हुए देखने का सपना कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी सभी पृष्ठभूमि के ईरानियों से इसमें शामिल होने को कहा है। यह पूरा आयोजन मुहर्रम के महीने में हो रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
