ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत ने पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति को हिला कर रख दिया है। अमेरिका और इसराइल के एक साझा ऑपरेशन में उनकी जान गई, जिसके बाद अब उनके बेटे मुजतबा खामनेई ने कमान संभाली है। इस बड़े बदलाव से ईरान के अंदर और बाहर काफी उथल-पुथल मची हुई है।

सत्ता का नया समीकरण और राजनीति

ईरान की राजनीति में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि अब सारी ताकत किसी एक व्यक्ति के पास रहने के बजाय सुरक्षा संस्थानों, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच बंट सकती है। मुजतबा खामनेई को असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने नया लीडर चुना है, लेकिन उनकी पकड़ जन समर्थन के बजाय गुटबाजी और युद्ध की स्थितियों पर टिकी है। खबर है कि मुजतबा उसी हमले में घायल हुए थे जिसमें उनके पिता की मौत हुई थी।

सैन्य रणनीति और क्षेत्रीय तनाव

अली खामनेई ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव और ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ की रणनीति के मुख्य योजनाकार थे। उनकी मौत के बाद ईरान ने उन देशों में हमले तेज कर दिए हैं जहाँ अमेरिकी सेना के बेस मौजूद हैं। इसके अलावा, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण जमाने की कोशिश कर रहा है और वहाँ अवैध टोल वसूलने की योजना बना रहा है।

वहीं, ईरान के शक्तिशाली जनरल अहमद वहिदी ने सामने आकर चेतावनी दी है कि उनके दुश्मन ईरान के आत्मसमर्पण का सपना कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। ईरान ने अमेरिका और इसराइल को साफ कह दिया है कि अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी हमले का नतीजा बहुत बुरा होगा।

परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ी चिंता

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया भर में डर बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ईरान खुले तौर पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है क्योंकि उसे लगता है कि केवल परमाणु क्षमता होने से उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। ‘पिकैक्स माउंटेन’ जैसे गुप्त अंडरग्राउंड ठिकानों पर अभी भी काम चलने की खबरें आ रही हैं।

क्षेत्रीय प्रभाव और अमेरिका की कोशिशें

मुजतबा खामनेई अब मुस्लिम दुनिया और अपने सहयोगी समूहों को एकजुट कर अमेरिका और इसराइल के खिलाफ एक ‘दिव्य मिशन’ का संदेश दे रहे हैं। दूसरी तरफ, अमेरिका ने इराक में अपने प्रभाव को बढ़ाने और ईरानी मिलिशिया को रोकने के लिए वहां डॉलर भेजने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की है ताकि बगदाद पर दबाव बनाया जा सके।