ईरान ने अमेरिका के साथ हुए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) के तहत अपनी सभी जिम्मेदारियों को खत्म करने का ऐलान कर दिया है। 18 जुलाई 2026 को ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने बताया कि यह फैसला अमेरिका द्वारा समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने के बाद लिया गया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझौते में किए गए वादों को पूरा करने के बजाय सैन्य हमले और पाबंदियां जारी रखीं।
समझौते का उल्लंघन और ईरान का रुख
यह समझौता 17 जून 2026 को हुआ था, जिसका मकसद युद्ध को रोकना, परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना था। हालांकि, 8 जुलाई 2026 को अमेरिका ने ईरान में फिर से सैन्य हमले शुरू कर दिए और 14 जुलाई 2026 को नौसैनिक नाकेबंदी को बहाल कर दिया। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंधों में ढील भी 17 जुलाई 2026 को खत्म हो गई।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने साफ किया है कि तेहरान अब किसी भी बातचीत की योजना नहीं बना रहा है। उनका पूरा ध्यान केवल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा पर केंद्रित है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने भी अमेरिका पर समझौते तोड़ने का आरोप लगाते हुए इसे अमान्य करार दिया है। वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अमेरिकी हमलों को समझौते का उल्लंघन माना है।
