ईरान ने 18 जुलाई 2026 को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते को रद्द कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने दोनों देशों के बीच हुए 14-सूत्रीय समझौते (MoU) की शर्तों को पूरा नहीं किया और नियमों का उल्लंघन किया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है।
समझौते को लेकर विवाद
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बताया कि अमेरिका ने समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभाया। वहीं, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत Reza Amiri Moghadam ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जा करने के इरादे से समझौते का गलत मतलब निकाला। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है और सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है, जो अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के खिलाफ है।
क्या था 14-सूत्रीय समझौता
यह समझौता जून 2026 में हुआ था जिसमें मुख्य रूप से ये बातें शामिल थीं:
- 60 दिन का सीजफायर यानी युद्धविराम।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना।
- ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील और $300 बिलियन का आर्थिक पैकेज।
- ईरान की तरफ से परमाणु हथियार न बनाने का वादा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पिछले हफ्ते ही इस समझौते को बेअसर करार दिया था। ईरानी अधिकारियों ने 2015 के JCPOA समझौते का भी जिक्र किया, जिससे अमेरिका पहले ही पीछे हट चुका है।
