ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुली चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उनकी जमीन पर हमला किया, तो वे सऊदी अरब के यानबू पोर्ट को निशाना बनाएंगे। इसके साथ ही ईरान ने मिडिल ईस्ट में रह रहे आम लोगों और प्रवासियों को अमेरिकी ठिकानों और सेना के होटलों से दूर रहने के लिए कहा है। ईरान के उप-राष्ट्रपति इस्माइल सघब इस्फ़हानी ने तो यहां तक कह दिया कि फुजैराह और यानबू की तबाही उनके लिए बस शुरुआत होगी।

किन इलाकों पर है हमले का खतरा और क्या है वजह?

ईरान ने साफ तौर पर सऊदी अरब के Red Sea तट पर स्थित यानबू पोर्ट और यूएई के फुजैराह को अपनी हिट लिस्ट में रखा है। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिकी सेना उनके देश पर जमीनी हमला करती है, तो ये दोनों पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेंगे। यह जानकारी सामने आई है कि:

  • ईरान ने नागरिकों से अमेरिकी सेना वाले इलाकों को तुरंत छोड़ने को कहा है जिससे उन्हें कोई नुकसान न हो।
  • रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का आरोप है कि अमेरिका और इसराइल आम लोगों को ढाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • हाल ही में 19 मार्च और 3 अप्रैल को यानबू के SAMREF रिफाइनरी पर ड्रोन हमले भी हुए थे।
  • ईरान के नए सुप्रीम लीडर के सलाहकार ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य को भी नया तनाव का केंद्र बताया है।

सऊदी अरब और अमेरिका का इस पर क्या है रुख?

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इन धमकियों और हमलों के बाद कहा है कि तेहरान के साथ भरोसा पूरी तरह टूट गया है। सऊदी अरब ने अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी सैन्य कदम उठाने की बात कही है। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी ईरान को सख्त चेतावनी दी है।

तारीख महत्वपूर्ण घटना
19 मार्च 2026 यानबू तेल टर्मिनल पर ड्रोन और मिसाइल हमला हुआ जिसे रोका गया
3 अप्रैल 2026 ईरानी ड्रोन ने SAMREF रिफाइनरी को निशाना बनाया
5 अप्रैल 2026 डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को बुनियादी ढांचे तबाह करने की चेतावनी दी
6 अप्रैल 2026 ईरान ने बाब अल-मंडेब में व्यापार रोकने की धमकी दी

सऊदी अरब के यानबू पोर्ट पर काम फिर से शुरू हो गया है लेकिन इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। ग्रीस की ओर से वहां पैट्रियट मिसाइल सिस्टम तैनात किया गया है ताकि किसी भी हवाई हमले को समय रहते रोका जा सके।