Gulf देशों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है। ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। अगर ऐसा हुआ तो पूरे इलाके में इंटरनेट बंद हो सकता है और बैंकिंग से लेकर बिजनेस तक सब कुछ रुक जाएगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अब डिजिटल चोकपॉइंट कहा जा रहा है क्योंकि यहां से दुनिया की कई बड़ी इंटरनेट लाइनें गुजरती हैं।
इंटरनेट और पैसों के लेन-देन पर क्या पड़ेगा असर?
ईरान की सरकारी मीडिया जैसे Fars News Agency और Tasnim News Agency ने संकेत दिए हैं कि वे undersea internet infrastructure को निशाना बना सकते हैं। उन्होंने इसे दबाव बनाने का आखिरी रास्ता बताया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये केबल्स कट गईं तो इसके गंभीर नतीजे होंगे:
- इंटरनेट की रफ्तार बहुत कम हो जाएगी और कई जगह पूरी तरह आउटेज होगा।
- बैंकों से होने वाले पैसों के लेन-देन में भारी देरी होगी।
- ऑनलाइन शॉपिंग और ई-कॉमर्स का काम पूरी तरह ठप हो सकता है।
- इस असर से न सिर्फ Gulf देश बल्कि भारत और मिस्र जैसे देशों की डिजिटल इकोनॉमी को भी नुकसान होगा।
कौन सी कंपनियां और केबल्स हैं खतरे में?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में AAE-1, FALCON, Gulf Bridge International, और SEA-ME-WE जैसी कई महत्वपूर्ण केबल्स बिछी हुई हैं। तनाव इतना बढ़ गया है कि बड़ी टेक कंपनियों ने अपने काम रोक दिए हैं। Meta ने 2Africa Pearls प्रोजेक्ट का काम फिलहाल बंद कर दिया है। केबल बिछाने वाली कंपनी Alcatel Submarine Networks (ASN) ने भी नोटिस जारी किया कि सैन्य ऑपरेशंस की वजह से वहां काम करना अब सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा AWS के UAE और Bahrain स्थित डेटा सेंटर्स पर भी ईरानी ड्रोन हमले हुए हैं। 5 मार्च 2026 को लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य को कमर्शियल जहाजों के लिए नो-गो ज़ोन बना दिया गया जिससे खराब केबल्स की मरम्मत करना अब नामुमकिन जैसा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
होर्मुज डिजिटल चोकपॉइंट क्या है?
यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जहां बहुत सारी इंटरनेट केबल्स एक साथ गुजरती हैं। अगर इस छोटे से इलाके में केबल्स को नुकसान पहुंचाया जाए तो पूरे क्षेत्र का इंटरनेट ठप हो सकता है।
Meta कंपनी ने अपना प्रोजेक्ट क्यों रोका?
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य अभियानों के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ गया था, इसलिए Meta ने 2Africa Pearls प्रोजेक्ट का काम बीच में ही रोक दिया।