अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब काफी बढ़ गया है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है, जिसके जवाब में ईरान ने रेड सी और अरब खाड़ी में व्यापार रोकने की धमकी दी है. इस टकराव से समुद्री रास्तों से होने वाले माल और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.
ईरान ने व्यापार रोकने की धमकी क्यों दी?
ईरान के सैन्य कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने अपनी नौसेना की नाकेबंदी जारी रखी, तो ईरान रेड सी, ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में व्यापार को बाधित कर देगा. ईरान ने इस नाकेबंदी को समुद्री डकैती बताया है. ईरान का कहना है कि अगर अमेरिकी सेना उसके जहाजों के लिए असुरक्षा पैदा करेगी, तो वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कड़ा फैसला लेगा.
अमेरिका की नाकेबंदी और ताजा हालात क्या हैं?
अमेरिका ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 से ईरान के पोर्ट्स पर नाकेबंदी शुरू की है. यह कदम पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद उठाया गया. अमेरिकी नौसेना ने रेडियो संदेशों के जरिए चेतावनी दी है कि नाकेबंदी का पालन न करने वाले जहाजों के साथ बल का प्रयोग किया जाएगा और उन्हें जब्त भी किया जा सकता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ युद्ध अब खत्म होने के करीब है.
अन्य देशों और संगठनों का क्या कहना है?
UN चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है. ब्रिटेन और फ्रांस जैसे NATO देशों ने अमेरिका की इस नाकेबंदी में शामिल होने से इनकार कर दिया है. वहीं, ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी का दावा है कि अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद उनके कुछ जहाज अभी भी दक्षिणी बंदरगाहों से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लिए रवाना हो रहे हैं.
