ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. ईरान ने सऊदी के Yanbu पोर्ट पर हमला करने की धमकी दी थी, जिसके जवाब में अब सऊदी अरब ने अपनी रणनीति बदल ली है. अब सऊदी इस पोर्ट को तेल निर्यात के लिए एक मुख्य विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहा है ताकि तेल की सप्लाई न रुके और कीमतों पर काबू रहे.
सऊदी अरब ने Yanbu पोर्ट को लेकर क्या तैयारी की है?
सऊदी अरब अब अपने Red Sea तट पर स्थित Yanbu पोर्ट को तेल भेजने के एक वैकल्पिक रास्ते के रूप में प्रमोट कर रहा है. यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि ईरान ने क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले किए थे, जिससे तेल की कीमतों में उछाल आया था. सऊदी अरब अपनी East-West पाइपलाइन के जरिए तेल को पूर्व से पश्चिम की ओर पंप कर रहा है, जिससे उसे Strait of Hormuz के रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
सऊदी सरकार और अन्य देशों का इस पर क्या कहना है?
सऊदी विदेश मंत्री Prince Faisal bin Farhan Al Saud ने साफ़ कहा है कि सऊदी अरब किसी भी दबाव में नहीं आएगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है. इसके अलावा, सऊदी अरब ने UAE, Bahrain, Qatar, Kuwait और Jordan की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है. Crown Prince Mohammed bin Salman ने UAE राष्ट्रपति Mohammed bin Zayed से फोन पर बात की और ईरान के हमलों के जवाब में UAE को हर संभव संसाधन देने का भरोसा दिलाया है.
ईरान की धमकियों और पिछले हमलों का क्या असर रहा?
ईरान की Revolutionary Guards ने पहले धमकी दी थी कि अगर अमेरिका ने ईरान की जमीन पर हमला किया, तो वे Yanbu पोर्ट को निशाना बनाएंगे. इसके अलावा, उन्होंने आम लोगों को अमेरिकी सैन्य कर्मियों वाले होटलों और ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी थी. मार्च 2026 में Yanbu के Samref रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ था और ड्रोन व बैलिस्टिक मिसाइलों से भी हमले किए गए थे, जिससे इस क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
Yanbu पोर्ट सऊदी अरब के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Yanbu पोर्ट सऊदी अरब को तेल को पूर्व से पश्चिम की ओर भेजने की सुविधा देता है. इससे सऊदी अरब Strait of Hormuz के रास्ते का इस्तेमाल किए बिना तेल एक्सपोर्ट कर सकता है.
सऊदी अरब ने किन देशों के प्रति समर्थन जताया है?
सऊदी अरब ने UAE, बहरीन, कतर, कुवैत और जॉर्डन के खिलाफ ईरानी हमलों की निंदा की है और UAE को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया है.