ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान ने साफ़ कह दिया है कि अगर उस पर कोई नया हमला हुआ तो वह दुनिया के लिए बेहद ज़रूरी Strait of Hormuz को बंद कर देगा। वहीं अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को इस तनाव का ज़िम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय का कहना है कि दक्षिणी ईरान के Sirik में अमेरिकी हमला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है। ईरान की सैन्य बॉडी Khatam al-Anbiya ने भी कहा है कि वे अमेरिकी हमलों का कड़ा जवाब देंगे। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी देश अपनी ज़मीन अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए देगा, उसे ईरान अपना साथी नहीं बल्कि हमलावर मानेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का जो समझौता था वह अब खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरान के नेताओं के साथ बातचीत को समय की बर्बादी बताया है। US Central Command (CENTCOM) ने 7 और 8 जुलाई 2026 के बीच ईरान में 80 से ज़्यादा जगहों पर हमले किए। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार साइट और रिवोल्यूशनरी गार्ड की 60 से ज़्यादा नावें शामिल थीं। साथ ही अमेरिका ने ईरानी तेल बेचने का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।
इस लड़ाई का असर आसपास के देशों पर भी दिख रहा है। 7 जुलाई को Hormuz के पास कतर के एक LNG टैंकर “Al Rakiyat” पर हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। कुवैत ने अपनी सीमा में 2 मिसाइल और 13 ड्रोन को हवा में ही रोक लिया। बहरीन में भी डर इतना था कि वहां तीन बार एयर रेड सायरन बजाए गए।
Joint Maritime Information Center ने अब Strait of Hormuz में खतरे के स्तर को “severe” यानी गंभीर घोषित कर दिया है। कतर, UAE, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों ने व्यापारिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि समुद्र के रास्ते सभी के लिए सुरक्षित रहने चाहिए।
