ईरान की अमेरिका को सीधी धमकी, कहा सीजफायर का इस्तेमाल कर सेना को किया और भी ज्यादा मजबूत.

तेहरान में सैन्य अधिकारियों ने एक बार फिर चेतावनी जारी की है कि अगर अमेरिका के साथ बातचीत का सिलसिला नहीं सुलझा, तो युद्ध फिर से शुरू हो सकता है। अल जजीरा की 4 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने खुलकर माना है कि उन्होंने सीजफायर के इस समय का भरपूर इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने और दोबारा तैयार होने में किया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने मंगलवार को यह साफ किया कि उनका देश अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वे युद्ध को और बढ़ाना नहीं चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर, सैन्य सलाहकार Mohsen Rezaei ने यह दावा किया कि जुलाई के दौरान ईरान ने अमेरिकी सेना को काफी नुकसान पहुंचाया है और उन्होंने अमेरिका को ही युद्ध भड़काने वाला बताया है।
सीधी बातचीत को लेकर उलझी हुई हैं खबरें
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि दोनों देशों के बीच चर्चा चल रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करीब है। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यह उनके पास खुद को बचाने का आखिरी मौका है। इसके उलट, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने किसी भी तरह की सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि जो भी बातचीत हो रही है, वह सिर्फ ओमान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को लेकर है।
अमेरिकी खजाना सचिव Scott Bessent और विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाया है। चर्चा यह है कि एक ऐसी योजना बन सकती है जिसमें प्रवेश ईरान के नियंत्रण में और बाहर निकलने का रास्ता ओमान के नियंत्रण में होगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। इस पूरे मामले में कतर का विदेश मंत्रालय भी सक्रिय है और सभी पक्षों के साथ राजनयिक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है, हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी सीधी मुलाकात का कोई कार्यक्रम तय नहीं है।
क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा की स्थिति
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अभी भी काफी ज्यादा बना हुआ है। मंगलवार को एक Liberia के झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हमला हुआ, जो 31 जुलाई के बाद से इस इलाके में ऐसी चौथी घटना है। अमेरिका ने 14 जुलाई को ईरानी बंदरगाहों पर समुद्री नाकाबंदी फिर से लागू कर दी थी, जिसकी वजह से दर्जनों व्यावसायिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा या उन्हें रोका गया। ईरान ने इसे युद्ध खत्म करने वाले समझौते का उल्लंघन बताया है। इसके साथ ही, यमन में हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों पर ड्रोन से हमले करने का दावा किया है। युद्ध के इस लंबे दौर में तेहरान में भारी नुकसान हुआ है, जहां 50,000 से अधिक घरों को क्षति पहुंची है। अमेरिका का दावा है कि उनके पास दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार मौजूद हैं, हालांकि रिपोर्ट बताती है कि इस संघर्ष के कारण उनकी सटीक मिसाइलों का जखीरा काफी कम हो गया है।