अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार और पूर्व आईआरजीसी (IRGC) कमांडर मोहसेन रजाई (Mohsen Rezaei) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि ट्रंप नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखकर और अत्यधिक मांगें रखकर तीसरी बार कूटनीति को धोखा दे रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रतिबंध नहीं हटाए जाते और नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक कोई बातचीत शुरू नहीं हो सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर संभावित समझौते के लिए कुछ बहुत ही कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में प्रमुख बातें शामिल हैं:

  • ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा।
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी शुल्क के जहाजों के लिए तुरंत खोला जाएगा।
  • पानी में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (water mines) को पूरी तरह हटाया जाएगा।
  • अमेरिका को ईरान के क्षतिग्रस्त परमाणु केंद्रों से अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को नष्ट करने की अनुमति देनी होगी।

ट्रंप ने घोषणा की थी कि अगर समझौता होता है, तो अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को हटा लेगा। वर्तमान में अमेरिका के लगभग 20 युद्धपोत इस क्षेत्र में नाकेबंदी लागू करने के लिए तैनात हैं।

ईरान ने अमेरिकी शर्तों को क्यों खारिज किया?

ईरान के अधिकारियों ने ट्रंप की इन मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े फैसले उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान तो हो रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है। इसके अलावा, ईरान ने साफ किया है कि वह दबाव की भाषा को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेगा।

क्षेत्र में इस समय क्या हैं सुरक्षा के हालात?

तनाव के बीच, अमेरिका और ईरान एक नाजुक युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ाने पर बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, इसी बीच कई हिंसक घटनाएं भी हुई हैं। पिछले 24 घंटों में कुवैत के एक हवाई अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले में कुछ अमेरिकी सैनिकों को मामूली चोटें आई हैं और दो अमेरिकी ड्रोन क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने कहा है कि अगर कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका ईरान पर फिर से सैन्य हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी कब शुरू की थी?

अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों और जहाजों की नाकेबंदी शुरू की थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस नाकेबंदी के कारण अब तक 115 वाणिज्यिक जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार ने बातचीत शुरू करने के लिए क्या शर्त रखी है?

मोहसेन रजाई ने स्पष्ट किया है कि कोई भी राजनीतिक प्रक्रिया या बातचीत तब तक शुरू नहीं हो सकती, जब तक ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाया नहीं जाता और हुए नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जाता।