अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने साफ़ तौर पर कहा है कि उनका देश किसी भी दबाव या धमकी के आगे घुटने नहीं टेकेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने पुष्टि की है कि अमेरिका ईरान के खास ठिकानों पर बड़े हमलों की तैयारी कर रहा है और राष्ट्रपति Donald Trump ने भी ईरान को बड़ी कीमत चुकाने की चेतावनी दी है।

अमेरिका की धमकी पर क्या है ईरान का रुख?

ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने 10 जून 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी भी धमकी के माहौल में बातचीत नहीं की है। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी धमकियों को हताशा का संकेत बताया है। इससे पहले मार्च 2026 में भी ईरानी राजदूत Ali Bahreini ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कहा था कि ईरान किसी भी दबाव या अवैध हमले के सामने नहीं झुकेगा। ईरान ने दावा किया है कि हालिया अमेरिकी और इजरायली हमलों में देश के 1,300 से अधिक लोग मारे गए हैं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

अमेरिका का हमला प्लान और ईरान की जवाबी नीति

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने कहा है कि अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले की तैयारी में है ताकि स्थायी युद्धविराम के लिए बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। दूसरी तरफ, एक्सपर्ट Trita Parsi का कहना है कि ईरान ने अब तुरंत और बेहद कड़ा जवाब देने की नीति अपनाई है ताकि अमेरिका को एकतरफा हमले करने से रोका जा सके। हाल ही में हुए अमेरिकी हमलों में ईरान के दो पानी के जलाशयों सहित नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद ईरान ने भी अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने दबाव को लेकर क्या कहा है?

ईरान के राजदूत ने साफ किया है कि तेहरान कभी भी किसी बाहरी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा और न ही दबाव में कोई बातचीत करेगा।

अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी क्यों कर रहा है?

अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth के अनुसार, यह हमले सीजफायर वार्ता के तहत दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हैं और राष्ट्रपति Trump ने बातचीत में देरी होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।

हालिया हमलों में ईरान के किस बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है?

ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हाल के अमेरिकी हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिसमें मुख्य रूप से पानी के दो बड़े जलाशय क्षतिग्रस्त हुए हैं।