ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने संयुक्त राष्ट्र (UN) प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। ईरान ने चेतावनी दी है कि इन हमलों की वजह से पूरे क्षेत्र में रेडियोधर्मी प्रदूषण फैलने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति ने खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि रेडिएशन का असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता है।

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ईरान के किन ठिकानों पर हुआ हमला और क्या है इसके खतरे?

ईरान के विदेश मंत्री ने अपनी चिट्ठी में उन खास ठिकानों का जिक्र किया है जिन्हें निशाना बनाया गया है। इसमें बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, नतंज संवर्धन सुविधा और खोंडाब भारी जल उत्पादन प्लांट शामिल हैं। अराक्छी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इन ठिकानों पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सीधा उल्लंघन है। खाड़ी देशों और विशेष रूप से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए यह एक बड़ा संकट हो सकता है। ईरान का दावा है कि अगर बुशहर जैसे प्लांट से रेडियोधर्मी रिसाव होता है, तो उसका असर तेहरान के मुकाबले खाड़ी देशों की राजधानियों पर अधिक तेजी से पड़ेगा।

IAEA और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया क्या है?

  • IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने बुशहर प्लांट के पास हुए हमले पर गहरी चिंता जताई है और अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील की है।
  • एजेंसी ने पुष्टि की है कि हाल के हफ्तों में यह चौथी ऐसी घटना है, जिसमें प्लांट की एक इमारत को नुकसान पहुंचा है और एक सुरक्षा कर्मचारी की मौत हुई है।
  • रूस ने भी परमाणु ठिकानों पर हुए इन हमलों का विरोध किया है और इन्हें तुरंत रोकने की मांग की है।
  • संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि बिना उकसावे की ऐसी सैन्य कार्रवाई वैश्विक शांति और सुरक्षा को खतरे में डालती है।
  • फिलहाल राहत की बात यह है कि ताजा हमले के बाद रेडिएशन के स्तर में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.