ईरान अब समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर अपना नियंत्रण करना चाहता है. इसके लिए उसने Hormuz जलडमरूमध्य में गुजरने वाले रूटों पर फीस लगाने की योजना बनाई है. अगर ऐसा होता है तो Google और Meta जैसी बड़ी कंपनियों को ईरान को भारी रकम देनी होगी, जिससे इंटरनेट सेवाओं और बैंकिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है.

ईरान की इस योजना में क्या है और कौन सी कंपनियां निशाने पर हैं?

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने ऐलान किया है कि समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के लिए अब ‘परमिट’ और ‘लाइसेंस फीस’ देना जरूरी होगा. सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने साफ कहा कि इंटरनेट केबल्स पर फीस लगाई जाएगी. इस योजना के तहत Google, Meta, Microsoft और Amazon जैसी बड़ी कंपनियों को ईरानी नियमों का पालन करना होगा. साथ ही, इन केबल्स की मरम्मत और रख-रखाव का पूरा अधिकार भी ईरान अपने पास रखना चाहता है.

आम लोगों और Gulf देशों पर इसका क्या असर होगा?

इस फैसले से UAE, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में इंटरनेट और बैंकिंग सेवाओं में रुकावट आने का डर है. भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है क्योंकि कई मुख्य केबल्स जैसे FALCON, GBI और AAE-1 इसी इलाके से गुजरती हैं. इस तनाव की वजह से Alcatel Submarine Networks जैसी बड़ी कंपनी ने इस क्षेत्र में केबल मरम्मत का काम फिलहाल रोक दिया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर केबल्स को नुकसान पहुँचाया गया या मरम्मत रोकी गई, तो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी काफी खराब हो सकती है.

ईरान कितना पैसा कमाना चाहता है और क्या हैं चुनौतियां?

ईरान के संसदीय सदस्य Mostafa Taheri के मुताबिक, इन फीस के जरिए ईरान करीब 15 अरब डॉलर तक की कमाई कर सकता है. ईरान इसे सूएज नहर की तरह अपनी संप्रभुता का अधिकार बता रहा है. हालांकि, अमेरिकी कंपनियों के लिए यह बहुत मुश्किल स्थिति है क्योंकि अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं. इन प्रतिबंधों के कारण अमेरिकी कंपनियां कानूनी तौर पर ईरान को कोई भुगतान नहीं कर सकती हैं.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान किन इंटरनेट केबल्स को नियंत्रित करना चाहता है?

ईरान मुख्य रूप से FALCON, Gulf Bridge International (GBI) और AAE-1 जैसी महत्वपूर्ण सबसी केबल्स पर नियंत्रण करना चाहता है जो Hormuz जलडमरूमध्य से गुजरती हैं.

क्या इस फैसले से इंटरनेट की कीमतें बढ़ेंगी?

हाँ, यदि Google और Amazon जैसी कंपनियों को भारी लाइसेंस फीस देनी पड़ती है, तो वे इस खर्चे को ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे इंटरनेट सेवा महंगी हो सकती है.