ईरान की इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी और 15 अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों ने दुनिया भर के शिक्षण संस्थानों से एकजुट होने की अपील की है। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल की तरफ से किए गए हमलों में उसके शैक्षणिक और सांस्कृतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। मार्च 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने इन हमलों को अपनी वैज्ञानिक बुनियाद को कमजोर करने की साजिश बताया है। इस मामले को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है।

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ईरानी विश्वविद्यालयों ने संयुक्त राष्ट्र से क्या मांग की है?

ईरान के 15 मुख्य विश्वविद्यालयों के प्रमुखों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में 28 फरवरी 2026 को हुए हमलों की कड़ी निंदा करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेही तय करने की मांग की गई है। ईरान का दावा है कि इन हमलों में न केवल आम नागरिक बल्कि कई स्कूलों और सांस्कृतिक संस्थानों को भी निशाना बनाया गया है। प्रशासन ने इसे जेनेवा कन्वेंशन और मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया है।

सुरक्षा को लेकर जारी हुई चेतावनी और ताज़ा अपडेट

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक चेतावनी जारी की है। इसमें पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थित उन विश्वविद्यालयों का ज़िक्र किया गया है जो अमेरिका या इज़राइल से जुड़े हुए हैं। सुरक्षा की दृष्टि से जारी किए गए मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • IRGC ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी और इज़राइली संबद्धता वाले संस्थान जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।
  • इन संस्थानों के पास रहने वाले लोगों और छात्रों को कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।
  • ईरान ने मांग की है कि अमेरिका आधिकारिक तौर पर ईरानी शिक्षण संस्थानों पर हुए बम धमाकों की निंदा करे।
  • Isfahan University of Technology और Tehran University of Science and Technology जैसे बड़े संस्थानों को हमलों में नुकसान पहुँचा है।
  • ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि परमाणु कार्यक्रम के नाम पर शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाना एक बहाना है।