ईरान ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) से अपील की है कि वह युद्ध के दौरान हुए मानवाधिकारों के उल्लंघन की कानूनी जांच करे। ईरान का कहना है कि पिछले 40 दिनों की जंग में अमेरिका और इसराइल ने मिलकर भारी तबाही मचाई है। इस मामले में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर क्या आरोप लगाए?
ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर के मुताबिक, इस युद्ध के दौरान अमेरिका और इसराइल ने करीब 1.3 लाख नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने इसे एक गैरकानूनी हमला बताया है। जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरैनी ने ICRC को एक चिट्ठी लिखकर बताया कि इन हमलों में एक प्राइमरी स्कूल भी शामिल था, जो 1949 के जेनेवा कन्वेंशन के नियमों का सीधा उल्लंघन है। ईरान के दूतावास ने वियना में भी यह बात कही कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए हमले बिना किसी उकसावे के किए गए थे।
ICRC चीफ की ईरान यात्रा और उनका स्टैंड
ICRC की प्रेसिडेंट मिर्जाना स्पोलजारिक 28 अप्रैल 2026 को ईरान पहुंचीं। वहां उन्होंने सरकारी अधिकारियों और ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी (IRCS) से मुलाकात की ताकि मानवीय संकट पर चर्चा की जा सके। स्पोलजारिक ने पहले ही चेतावनी दी थी कि परमाणु केंद्रों जैसे जरूरी ठिकानों पर हमले की धमकी देना गलत है और इसे युद्ध का नया तरीका नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं, 3 अप्रैल को बुशेहर प्रांत में IRCS के एक गोदाम पर हुए हमले के बाद मानवीय संपत्तियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग भी की गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने ’40-day war’ किसे कहा है?
यह उस संघर्ष की अवधि है जो 28 फरवरी 2026 के आसपास शुरू हुआ, जिसमें ईरान के मुताबिक अमेरिका और इसराइल ने उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किए।
ICRC की प्रेसिडेंट ने ईरान यात्रा के दौरान क्या चर्चा की?
मिर्जाना स्पोलजारिक ने मानवीय परिणामों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन पर चर्चा की, ताकि युद्ध के दौरान आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को बचाया जा सके।